राजस्थान: अनंता रिसॉर्ट पर सरकार का शिकंजा, अजबगढ़ में रियायतों पर रोक; अब दूसरे रिसॉर्ट भी जांच के दायरे में
राजस्थान में आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर के परिवार की अनंता रिसॉर्ट में विला खरीद का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सरकार ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत विशेष निवेश रियायतों के लाभ और वितरण पर रोक लगाई है। अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट से जुड़ा मामला अब एसीबी की जांच में है। वहीं, जांच में कंपनी को कथित सरकारी लाभ और अधिकारियों के साथ संपत्ति लेनदेन के संबंधों की पड़ताल की जा रही है।

मुख्य बातें
- अनंता रिसॉर्ट पर सरकार की कार्रवाई, रियायतों पर रोक से बढ़ी मुश्किलें
- अजबगढ़ से पुष्कर तक अनंता रिसॉर्ट की जांच की उठी मांग
- विला खरीद और सरकारी रियायतों का कनेक्शन? एसीबी की जांच तेज
RAJASTHAN, 04 NOV. 2026:
अनंता रिसॉर्ट की रियायतों पर रोक, एसीबी जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगा लाभ
राजस्थान में अनंता रिसॉर्ट से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज के लाभ और वितरण पर रोक लगाई है। कंपनी अनंता ब्रांड के होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है। यह फैसला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप के बाद लिया गया। सरकारी निर्णय के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच पूरी होने तक कंपनी को स्वीकृत रियायतों का लाभ नहीं मिलेगा। यह कार्रवाई फिलहाल कंपनी के विशेष पैकेज से संबंधित है। इसे सभी रिसॉर्टों की सीलिंग या संचालन बंद करने की कार्रवाई नहीं माना जाना चाहिए।
दो करोड़ के विला की कथित खरीद का मामला कैसे आया सामने?
इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर के परिवार द्वारा अनंता रिसॉर्ट में विला खरीदने का मामला प्रमुख है। मीडिया रिपोर्टों और एसीबी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, परिवार ने उदयपुर के बूझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में कई विला और कॉटेज खरीदे। आरोप है कि कुछ संपत्तियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गईं। उपलब्ध रिपोर्टों में 40 संपत्तियों की खरीद का उल्लेख है। इनके लिए कुल करीब 6.16 करोड़ रुपये चुकाने की बात सामने आई है। हालांकि, वास्तविक बाजार मूल्य और लेनदेन की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
40 विला-कॉटेज खरीद और किराये पर देने का मामला
रिपोर्टों के अनुसार, शिखर अग्रवाल के परिवार ने लगभग ढाई साल की अवधि में 40 विला और कॉटेज खरीदे। इन संपत्तियों में उदयपुर के बूझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों में इन संपत्तियों को वापस कंपनी को लीज पर देने का भी उल्लेख है। बताया गया है कि इनसे सालाना लगभग 1.80 करोड़ रुपये किराये की आय होने की व्यवस्था थी। इस लेनदेन की शर्तें, संपत्तियों का मूल्यांकन और किराया समझौते जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। सवाल यह भी है कि क्या संपत्ति खरीद और सरकारी रियायतों के फैसलों के बीच कोई संबंध था।
एसीबी जांच में सरकारी फैसले और कंपनी को मिले लाभ भी शामिल
राजस्थान एसीबी ने 30 अक्टूबर को राज्य सरकार की मंजूरी के बाद मामले में प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच में कथित तौर पर पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका की पड़ताल हो रही है। ब्यूरो के अनुसार, रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट, आवश्यक प्रमाणपत्रों के उचित सत्यापन के बिना मंजूरियों और विशेष वित्तीय पैकेज जैसे पहलू जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसी संबंधित अधिकारियों और कंपनी के बीच संभावित लेनदेन का संबंध भी तलाश रही है। फिलहाल आरोपों को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर पर भी प्रशासनिक कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ किया। उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर को भी एपीओ किया गया। कार्मिक विभाग की ओर से दोनों को नोटिस जारी कर संपत्ति खरीद और संबंधित तथ्यों पर स्पष्टीकरण मांगा गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एसीबी संपत्ति के दस्तावेज, रजिस्ट्री और सरकारी फैसलों की जांच कर रही है। एपीओ और नोटिस प्रशासनिक कदम हैं। इन्हें अपने आप में किसी अधिकारी के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष आगे की स्थिति तय करेंगे।
अजबगढ़ के अलावा दूसरे अनंता रिसॉर्टों की भी जांच की मांग
अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट पर रियायतों के लाभ रोके जाने के बाद दूसरे रिसॉर्टों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अनंता के जयपुर, उदयपुर और पुष्कर सहित अलग-अलग स्थानों पर होटल और रिसॉर्ट बताए जाते हैं। ऐसे में यह मांग उठाई जा रही है कि जांच केवल अजबगढ़ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जहां भी सरकारी रियायतें, भूमि उपयोग परिवर्तन, निर्माण अनुमति या अन्य स्वीकृतियां दी गई हैं, वहां नियमों के पालन की जांच होनी चाहिए। हालांकि, किसी रिसॉर्ट का नाम जांच की मांग में शामिल होना अनियमितता साबित नहीं करता। प्रत्येक संपत्ति के दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
पुष्कर रिसॉर्ट पर भी उठे सवाल, पुराने नोटिसों की जांच जरूरी
पुष्कर स्थित अनंता रिसॉर्ट को लेकर भी पहले शिकायतें और सवाल सामने आने का दावा किया गया है। आरोपों में वन विभाग की भूमि पर कब्जे और पवित्र पुष्कर सरोवर में पानी की आवक प्रभावित होने जैसे मुद्दे शामिल हैं। पूर्व में नगर पालिका की ओर से नोटिस जारी होने की बात भी कही गई है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए नोटिस, राजस्व रिकॉर्ड, वन भूमि के नक्शे और जल निकासी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी है। यदि पहले शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उसके कारण भी सामने आने चाहिए। पुष्कर के मामले में निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच की मांग की जा सकती है।
जयपुर, उदयपुर और अजमेर की संपत्तियों पर भी उठ रहे प्रश्न
अनंता ब्रांड के अन्य रिसॉर्टों और गोयल फैशंस से जुड़ी संपत्तियों को लेकर भी जांच की मांग की जा रही है। जयपुर और उदयपुर के रिसॉर्टों में भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति और अन्य मंजूरियों की प्रक्रिया की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। अजमेर के वरुण सागर रोड पर कंपनी से जुड़ी होटल संपत्ति के निर्माण और भूमि संबंधी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। इन मामलों में संबंधित स्वीकृतियां, सड़क चौड़ीकरण की योजना, भूमि की सीमाएं और स्वामित्व रिकॉर्ड देखना जरूरी होगा। अभी इन शिकायतों को प्रमाणित अनियमितता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
निवेश प्रोत्साहन योजना में रियायतों की पारदर्शिता पर सवाल
राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम के तहत निवेशकों को निर्धारित शर्तों पर विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाते हैं। अनंता प्रकरण में विशेष पैकेज और सरकारी फैसलों के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एसीबी की प्रारंभिक जांच में 27 मार्च 2026 को कंपनी को वित्तीय पैकेज दिए जाने और उसी दिन संपत्तियों के पंजीकरण से जुड़े घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि मंजूरी निर्धारित नियमों के अनुसार दी गई थी या नहीं। सरकारी सहायता का उद्देश्य निवेश और रोजगार बढ़ाना है। इसलिए सार्वजनिक धन और रियायतों का इस्तेमाल पारदर्शी होना चाहिए।
मुख्यमंत्री की कार्रवाई के बाद अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद
अनंता रिसॉर्ट प्रकरण में सरकारी रियायतों पर रोक को भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए कंपनी को मिलने वाले विशेष पैकेज के लाभ रोक दिए हैं। अब सबसे अहम सवाल जांच की निष्पक्षता और उसके दायरे का है। यदि अन्य रिसॉर्टों या अधिकारियों से जुड़े दस्तावेजों में भी अनियमितताएं मिलती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, जिन लोगों पर आरोप हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकलना चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
...
इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं





