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जयपुर : IAS शिखर अग्रवाल और IPS प्रशाखा माथुर से 7 दिन में जवाब तलब, विला विवाद में बढ़ी कार्रवाई

राजस्थान में विला और कॉटेज खरीद से जुड़े विवाद में एपीओ चल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कार्मिक विभाग ने दोनों अधिकारियों से सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने संपत्तियों की खरीद, भू-रूपांतरण और पंजीयन से संबंधित रिकॉर्ड जुटाने के लिए कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं। दूसरी ओर, उद्योग विभाग ने गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत स्वीकृत विशेष पैकेज का लाभ देने पर रोक लगा दी है।

शिखर अग्रवाल और डॉ. प्रशाखा माथुर

मुख्य बातें

  • विला विवाद में शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर से 7 दिन में जवाब तलब
  • 28 विला-कॉटेज और संपत्ति विवरण पर सवाल, अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
  • राजस्थान के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर बढ़ा दबाव, ACB ने कई विभागों को भेजे नोटिस

JAIPUR,03 NOV. 2026:

सात दिन में जवाब देने के निर्देश, आगे की कार्रवाई जवाब पर निर्भर

विला-कॉटेज खरीद विवाद में कार्मिक विभाग ने शिखर अग्रवाल और डॉ. प्रशाखा माथुर से सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग दोनों अधिकारियों से उनकी संपत्तियों और वार्षिक संपत्ति विवरण में दी गई जानकारी को लेकर जवाब चाहता है।बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय किया जाएगा। यदि सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विभागीय जांच सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। निलंबन की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल इसे संभावित कार्रवाई के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम निर्णय विभागीय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।

ACB ने गोयल फैशन्स सहित कई विभागों को भेजे नोटिस

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने गोयल फैशन्स कंपनी के साथ वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और उद्योग विभाग से रिकॉर्ड मांगा है।इसके अलावा उदयपुर और अलवर के राजस्व अधिकारियों तथा पंजीयन विभाग के अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित संपत्तियां कब और किस प्रक्रिया के तहत खरीदी गईं। साथ ही, जमीन के भू-रूपांतरण और पंजीयन में किन अधिकारियों की भूमिका रही, इसकी भी जांच की जा रही है।

उदयपुर और अलवर के पंजीयन रिकॉर्ड की भी जांच

एसीबी सूत्रों के अनुसार, उदयपुर जिला प्रशासन और उदयपुर तथा अलवर के उप पंजीयक कार्यालयों से भी जानकारी मांगी गई है। अलवर जिले के प्रतापगढ़ स्थित उप पंजीयक कार्यालय को भी नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।जांच का मुख्य उद्देश्य संपत्तियों के खरीद दस्तावेज, पंजीयन प्रक्रिया और संबंधित सरकारी अनुमतियों की पड़ताल करना है। एजेंसी यह भी देख रही है कि जमीन के उपयोग में बदलाव के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। अलग-अलग विभागों से रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

गोयल फैशन्स को रिप्स पैकेज का लाभ देने पर रोक

इस विवाद के बीच उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) के तहत स्वीकृत कस्टमाइज्ड पैकेज का लाभ देने पर रोक लगा दी है।जानकारी के अनुसार, कंपनी को इसी साल मार्च में विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया था। अब एसीबी की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक इससे जुड़े परिलाभ जारी नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय राज्य स्तरीय छानबीन समिति के फैसले के आधार पर उद्योग आयुक्त की ओर से जारी किया गया है। इससे कंपनी को मिलने वाली प्रस्तावित सरकारी रियायतें फिलहाल अटक गई हैं।

वार्षिक संपत्ति विवरण में 14 विला का उल्लेख नहीं होने का आरोप

मामले में वार्षिक संपत्ति विवरण यानी आईपीआर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बुझड़ा और अजबगढ़ में संबंधित अधिकारियों के नाम से कुल 28 विला-कॉटेज होने की बात कही जा रही है। हालांकि, संपत्ति विवरण में केवल 14 विला-कॉटेज का उल्लेख बताया गया है।जानकारी के मुताबिक, शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी को दाखिल आईपीआर में 14 विला-कॉटेज की जानकारी दी थी। वहीं, प्रशाखा माथुर की ओर से 8 जनवरी 2026 को दाखिल संपत्ति विवरण में इन संपत्तियों का उल्लेख नहीं होने की बात कही गई है। इस बिंदु पर दोनों अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संपत्ति विवरण में कथित अंतर और उसके कारणों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों तथा अधिकारियों के जवाब के बाद ही हो सकेगी।

जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल इस पूरे मामले में कार्मिक विभाग और एसीबी की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। एक ओर एसीबी संपत्तियों की खरीद और सरकारी मंजूरियों से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है। वहीं, कार्मिक विभाग दोनों अधिकारियों के जवाब का इंतजार कर रहा है।जांच में यदि नियमों के उल्लंघन या अनियमितताओं के तथ्य सामने आते हैं, तो आगे विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, अभी किसी अधिकारी के खिलाफ आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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