जयपुर की जड़ों से अमेरिकी संसद तक पहुंचीं पिया डांडिया, ट्रंप समर्थित उम्मीदवार को हराया
अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। भारतीय मूल के परिवार से आने वाली पिया का जयपुर से पारिवारिक रिश्ता है। हार्वर्ड से पढ़ाई, दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को पढ़ाने और व्हाइट हाउस में काम करने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।

मुख्य बातें
- ट्रंप समर्थित उम्मीदवार को हराने वाली पिया डांडिया कौन हैं?
- भारतीय मूल की पिया डांडिया की जीत, फ्लोरिडा में रचा नया इतिहास
- दिल्ली की झुग्गियों में पढ़ाया, अब अमेरिकी संसद में निभाएंगी जिम्मेदारी
FLORIDA, 04 NOV. 2026:
फ्लोरिडा में पिया डांडिया की जीत, केसी अस्कर को दी शिकस्त
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का मुकाबला चर्चा में रहा। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डांडिया ने रिपब्लिकन प्रत्याशी केसी अस्कर को पराजित किया। अस्कर कारोबारी और पूर्व मरीन कॉर्प्स सैनिक हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का समर्थक माना जाता है। इस जीत के साथ पिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हुई हैं। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, पिया को 51.9 प्रतिशत और अस्कर को 48.1 प्रतिशत वोट मिले। यह मुकाबला नए परिसीमन वाले क्षेत्र में हुआ था।
जयपुर से जुड़ी हैं पिया डांडिया की पारिवारिक जड़ें
पिया डांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके माता-पिता मूल रूप से भारत से अमेरिका पहुंचे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका परिवार राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़ा है। पिया का बचपन भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं के बीच भी बीता। उनके माता-पिता उन्हें बचपन में भारत भेजते थे। इन यात्राओं से उन्हें भारतीय समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिला। भारत से जुड़ाव ने उनकी सामाजिक सोच और सार्वजनिक सेवा की दिशा को प्रभावित किया।
हार्वर्ड में पढ़ाई, दिल्ली की झुग्गियों में बच्चों को पढ़ाया
पिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से गवर्नमेंट विषय में स्नातक की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने का काम भी किया। वह आशा कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़ी थीं। इस दौरान उन्होंने सात से 17 वर्ष तक के बच्चों के साथ काम किया। इस अनुभव ने उन्हें शिक्षा और अवसरों की असमानता को समझने में मदद की। पिया के लिए यह अनुभव केवल अध्यापन तक सीमित नहीं था। इससे उन्हें सामाजिक परिस्थितियों और बच्चों के भविष्य के बीच के संबंध को समझने का अवसर मिला।
शिक्षक से स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल तक का सफर
हार्वर्ड के बाद पिया ने बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उन्होंने अमेरिका में टीच फॉर अमेरिका कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उस समय उनकी उम्र करीब 28 वर्ष थी। उनके नेतृत्व में स्कूल के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच पर जोर दिया गया। कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाना उनके काम का प्रमुख हिस्सा रहा।
व्हाइट हाउस फेलो और एप्पल में भी किया काम
वर्ष 2020 में पिया डांडिया को व्हाइट हाउस फेलो चुना गया। इस दौरान उन्होंने घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। उनके अनुभव में अलग-अलग प्रशासन के साथ सार्वजनिक सेवा का अवसर भी शामिल रहा। इसके बाद उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों पर काम किया। उनका फोकस शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर था। उन्हें इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने राज्य की पी-20 परिषद में भी नियुक्त किया था। इस तरह शिक्षा, प्रशासन और तकनीक के क्षेत्र में उन्होंने अनुभव हासिल किया।
महंगाई, शिक्षा और भ्रष्टाचार बने चुनावी मुद्दे
पिया डांडिया ने अपने चुनाव प्रचार में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने आम परिवारों की बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव पर ध्यान केंद्रित किया। इसके अलावा, उन्होंने वाशिंगटन की राजनीति में भ्रष्टाचार और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उनके प्रचार में आर्थिक अवसरों को बढ़ाने और परिवारों के लिए बेहतर भविष्य की बात प्रमुख रही। दूसरी ओर, रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों का समर्थन किया। इस मुकाबले में स्थानीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव भी दिखाई दिया।
चुनावी चंदे में अस्कर आगे, लेकिन नतीजा पिया के पक्ष में
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच आर्थिक संसाधनों का अंतर भी चर्चा में रहा। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 14 अक्टूबर तक पिया डांडिया के अभियान को लगभग 46 लाख डॉलर मिले थे। वहीं, केसी अस्कर ने करीब 74 लाख डॉलर जुटाए थे। हालांकि, अस्कर की राशि का बड़ा हिस्सा उनके खुद के अभियान को दिए गए कर्ज से आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब 68 लाख डॉलर स्वयं लगाए थे। अधिक धन जुटाने के बावजूद अस्कर चुनाव नहीं जीत सके। यह मुकाबला बताता है कि चुनावी नतीजे केवल प्रचार बजट से तय नहीं होते।
प्रमिला जयपाल ने दी बधाई, भारतीय-अमेरिकी समुदाय में चर्चा
पिया की जीत पर भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पिया का स्वागत करने को लेकर उत्साह जताया। पिया की जीत से भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की अमेरिकी राजनीति में मौजूदगी को नई चर्चा मिली है। उन्हें दक्षिण एशियाई-अमेरिकी समुदाय की नई महिला प्रतिनिधियों में गिना जा रहा है। पिया पाम बीच गार्डन्स में अपने परिवार के साथ रहती हैं। शिक्षा और सार्वजनिक सेवा से राजनीति तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय मूल के परिवारों के लिए भी खास महत्व रखता है।
प्रशासन का पक्ष
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