राजस्थान: 8 मजदूरों की मौत से दो गांवों में मातम, 8 चिताएं जलीं; परिवारों का दर्द देख नम हुईं आंखें
झुंझुनूं जिले के छापोली और मंडावरा गांवों में निर्माणाधीन सड़क पर हुए भीषण करंट हादसे ने आठ परिवारों को उजाड़ दिया। हादसे में आठ मजदूरों की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हो गए। बुधवार को हादसे के तीसरे दिन भी दोनों गांवों में मातम पसरा रहा। मृतकों का अंतिम संस्कार हो चुका है। वहीं, डिस्कॉम ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे की जांच के लिए कमेटी भी गठित की गई है।

मुख्य बातें
- छापोली में सड़क निर्माण के दौरान बिजली लाइन की चपेट में आने से आठ मजदूरों की जान चली गई।
- हादसे में पांच अन्य लोग भी घायल हुए। सभी प्रभावित परिवारों में शोक का माहौल है।
- मृतकों के परिवारों और घायलों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए कमेटी गठित की गई है।
JHUNJNU, 04 NOV. 2026:
आठ परिवारों की खुशियां मातम में बदलीं, दो गांवों में पसरा सन्नाटा
झुंझुनूं जिले के छापोली और मंडावरा गांवों में हुए भीषण करंट हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। निर्माणाधीन सड़क पर बिजली लाइन की चपेट में आने से आठ मजदूरों की मौत हो गई। हादसे के बाद दोनों गांवों में शोक की लहर फैल गई। किसी परिवार ने अपना बेटा खोया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं, कई बुजुर्ग माता-पिता का सहारा छिन गया। बुधवार को हादसे के तीसरे दिन भी गांवों में मातम पसरा रहा। आठों मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है, लेकिन उनके परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ।
कहीं बच्चों ने पिता खोया तो कहीं माता-पिता का छिन गया सहारा
इस हादसे ने आठ परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। किसी मां की गोद सूनी हो गई तो किसी मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया। किसी बहन ने अपना भाई खो दिया। हादसे के बाद दोनों गांवों की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हालात ऐसे रहे कि कई घरों में एक दिन चूल्हे तक नहीं जले। ग्रामीण भी पीड़ित परिवारों के दुख में शामिल रहे। आर्थिक सहायता की घोषणा और सरकारी कार्रवाई के बीच परिवारों के लिए अपनों को खोने का दर्द सबसे बड़ा है।
डिस्कॉम ने मुआवजे के लिए गठित की कमेटी
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए डिस्कॉम ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। मृतकों के परिवारों और घायलों को मुआवजा दिलाने के साथ हादसे की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। डिस्कॉम के एसई रवींद्र खींचड़ के अनुसार, प्रभावित परिवारों को निर्धारित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग का प्रयास है कि एक सप्ताह के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, मुआवजे से परिवारों को आर्थिक संबल मिल सकता है, लेकिन अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।
पांच साल से सड़क की मांग, जनसहयोग से शुरू कराया निर्माण
छापोली में हुए हादसे के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया और विभागीय अनुमति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, धार्मिक स्थल कदमकुंड स्टेट हाईवे से करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए ग्रामीण लंबे समय से यहां सड़क बनाने की मांग कर रहे थे। वन विभाग की जमीन होने के कारण निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। ग्रामीणों ने करीब पांच साल इंतजार किया। इसके बाद जनसहयोग से धनराशि जुटाकर सड़क निर्माण शुरू कराने का फैसला लिया। निर्माण कार्य आरसीसी का काम करने वाले ठेकेदार को सौंपा गया था।
मशीन खिसकने से हुआ हादसा, बिजली लाइन की चपेट में आया हिस्सा
जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण का काम कुछ दिनों से बंद था। सोमवार को दोबारा काम शुरू किया गया था। सड़क पर रोडी-कंकरीट मिलाने के लिए मिक्सर मशीन लाई गई थी। उस समय मशीन के आसपास एक दर्जन से अधिक लोग मौजूद थे। इसी दौरान ढलान के कारण मशीन खिसकने लगी। मजदूर उसे रोकने के लिए दौड़े। मशीन को संभालने के प्रयास के बीच उसका लिफ्ट वाला हिस्सा ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। इससे करंट फैल गया और आठ मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में पांच अन्य लोग घायल भी हुए।
डिस्कॉम का दावा-निर्धारित मानकों के अनुसार ऊंचाई पर थे बिजली के तार
बिजली के तारों की ऊंचाई को लेकर उठ रहे सवालों पर डिस्कॉम के एसई रवींद्र खींचड़ ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि विभाग के अनुसार बिजली लाइन के तार निर्धारित मानकों के अनुरूप ऊंचाई पर थे। सड़क निर्माण शुरू करने से पहले डिस्कॉम को इसकी सूचना नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि यदि विभाग को निर्माण की जानकारी मिलती तो तारों को और ऊंचाई पर करने की व्यवस्था की जा सकती थी। सड़क का स्तर बढ़ने से तारों और सड़क के बीच की दूरी कम हुई होगी। हालांकि, विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
विभागीय समन्वय और निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद निर्माण कार्य से जुड़े विभागों के बीच समन्वय और सुरक्षा इंतजामों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पांच साल से सड़क निर्माण की मांग लंबित रहने के बाद ग्रामीणों ने जनसहयोग से काम शुरू कराया था। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि निर्माण के दौरान बिजली विभाग को सूचना क्यों नहीं दी गई। भारी मशीन को बिजली लाइन के आसपास संचालित करने से पहले सुरक्षा उपाय किए गए थे या नहीं, इसकी भी जांच होनी है। इसके अलावा सड़क निर्माण की अनुमति और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी हादसे की जिम्मेदारी
डिस्कॉम ने हादसे की जांच के लिए कमेटी गठित की है। वहीं, मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच में बिजली लाइन की ऊंचाई, सड़क के बढ़े हुए स्तर, मशीन के संचालन और कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की जाएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार थे। फिलहाल छापोली और मंडावरा के आठ परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दुख से गुजर रहे हैं। दोनों गांवों में पसरा मातम इस हादसे की भयावहता बयां कर रहा है।
प्रशासन का पक्ष
..
इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं





