IAS पदोन्नति में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, डोटासरा और जूली ने भजनलाल सरकार को घेरा
राजस्थान में गैर-आरएएस अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नति देने की प्रक्रिया में देरी का मामला राजनीतिक तकरार का मुद्दा बन गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को 15 दिन के भीतर कानून के अनुसार फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण फैसले लेने में देरी कर रही है और दिल्ली से निर्देश मिलने का इंतजार करती है।

मुख्य बातें
- IAS पदोन्नति में देरी पर हाईकोर्ट की सख्ती, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
- डोटासरा बोले- दिल्ली की पर्ची के बिना फैसले नहीं ले पा रही भाजपा सरकार
- गैर-आरएएस से IAS पदोन्नति का मामला गरमाया, कांग्रेस ने उठाए सवाल
JAIPUR, 03 NOV. 2026:
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरा
गैर-आरएएस अधिकारियों की आईएएस में पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया में देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से जवाबदेही तय करने को कहा है। अदालत ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर इस मामले में कानूनसम्मत निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रशासनिक मामलों में निर्णय लेने में देरी से अधिकारियों और शासन व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
डोटासरा बोले- राजस्थान को फैसला लेने वाली सरकार कब मिलेगी?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान को निर्णय लेने वाली सरकार कब मिलेगी। डोटासरा ने भाजपा सरकार को ‘पर्ची सरकार’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह दिल्ली से निर्देश और हाईकोर्ट की फटकार के बिना फैसले नहीं ले पा रही है। उन्होंने कहा कि कमजोर नेतृत्व और निर्णयहीनता के कारण सरकार के कामकाज में बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप की स्थिति बन रही है।
दिसंबर 2025 से पदोन्नति की फाइल अटकी होने का दावा
डोटासरा ने दावा किया कि गैर-आरएएस अधिकारियों की आईएएस पदोन्नति से जुड़ी फाइल दिसंबर 2025 से सरकार के स्तर पर लंबित है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार यूपीएससी को 45 दिनों में अपनी टिप्पणी भेजी जानी थी। इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। डोटासरा ने सवाल किया कि चयनित अधिकारियों से जुड़ी फाइल इतने लंबे समय तक किस कारण अटकी रही। उन्होंने हाईकोर्ट के 15 दिन में फैसला लेने के निर्देश को सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल के रूप में पेश किया।
भर्ती, पंचायत चुनाव और स्कूल मरम्मत में देरी के भी आरोप
डोटासरा ने केवल आईएएस पदोन्नति का मामला ही नहीं उठाया, बल्कि एसआई भर्ती, पंचायत और निकाय चुनाव तथा सरकारी स्कूलों की मरम्मत जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी मामलों में देरी और निर्णयहीनता दिखाई दे रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि जिन फैसलों की जिम्मेदारी सरकार की है, उनके लिए भी अदालत को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री की निर्णय लेने की क्षमता पर भी सवाल उठाए।
टीकाराम जूली बोले- दिल्ली की पर्चियों के सहारे चल रही सरकार
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी एक्स पर पोस्ट कर भजनलाल सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गैर-प्रशासनिक सेवाओं से आईएएस चयन की प्रक्रिया से जुड़ी यूपीएससी सूची लंबे समय से लंबित है। जूली के मुताबिक, हाईकोर्ट ने सरकार को 15 दिनों में कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार प्रशासनिक फैसले लेने में देरी क्यों कर रही है। जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार हर निर्णय के लिए दिल्ली से निर्देश मिलने का इंतजार करती है।
सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जूली ने कहा कि उन्होंने जुलाई में भी इस मामले में सरकार से निर्णय लेने की मांग की थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार खुद फैसले लेने में सक्षम नहीं है या हर मामले में दिल्ली से निर्देशों का इंतजार किया जाता है। जूली ने कहा कि एक प्रशासनिक फैसले में महीनों लगना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेताओं के इन बयानों के बाद गैर-आरएएस से आईएएस पदोन्नति का मामला प्रशासनिक मुद्दे के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
अब 15 दिन में सरकार के फैसले पर रहेगी नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले में राज्य सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी। अदालत ने 15 दिनों में कानूनसम्मत निर्णय लेने को कहा है। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे को सरकार की निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक कामकाज से जोड़कर भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। फिलहाल पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की स्थिति और सरकार के निर्णय का इंतजार है।
प्रशासन का पक्ष
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