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जयपुर में 35 हजार लीटर संदिग्ध घी जब्त, 7 ब्रांड के नाम पर हो रही थी पैकिंग

राजधानी जयपुर के चौमूं क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग ने डेयरी उत्पादों की एक फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब 35 हजार लीटर संदिग्ध घी जब्त किया है। फैक्ट्री में सात अलग-अलग ब्रांड के नाम से घी की पैकिंग की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान संदिग्ध फ्लेवर, भंडारण और लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। विभाग ने फैक्ट्री को सीज कर घी और फ्लेवर के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। इसके अलावा मोरीजा और चीथवाड़ी में मावा व दूध निर्माण इकाइयों का भी निरीक्षण किया गया।

35 हजार लीटर संदिग्ध घी जब्त

मुख्य बातें

  • जयपुर में घी की फैक्ट्री पर छापा, 35 हजार लीटर संदिग्ध घी जब्त
  • सात ब्रांड के नाम पर घी की पैकिंग, चौमूं में फैक्ट्री सीज
  • 35 हजार लीटर घी और संदिग्ध फ्लेवर बरामद, खाद्य विभाग की कार्रवाई

JAIPUR,03 NOV. 2026:

चौमूं की फैक्ट्री में मिला हजारों लीटर घी

जयपुर जिले के चौमूं क्षेत्र के जैतपुरा में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने डेयरी उत्पाद बनाने वाली एक फैक्ट्री पर कार्रवाई की। सीएमएचओ फर्स्ट डॉ. रवि शेखावत के अनुसार, परिसर में करीब 35 हजार लीटर घी मिला। फैक्ट्री में सात अलग-अलग ब्रांड के नाम से इसकी पैकिंग की जा रही थी। मौके पर अलग-अलग आकार के पैक और बड़े साइलो में घी का भंडारण पाया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने निर्माण और पैकेजिंग इकाई सहित पूरी फैक्ट्री को सीज कर दिया।

सात ब्रांड के नाम से हो रही थी पैकिंग

खाद्य सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में राजस्थान सरस, डेयरी ब्रदर्स, श्री किरण सरस, माटुला, चॉइस डेयरी, रघु श्री और गणक ब्रांड के नाम से घी की पैकिंग मिलना सामने आया। फैक्ट्री में 200 एमएल, 500 एमएल, एक लीटर, दो लीटर, पांच लीटर और 15 लीटर की पैकिंग उपलब्ध थी। इसके अलावा बड़े साइलो में हजारों लीटर घी पैकिंग के लिए रखा गया था। विभाग अब इन ब्रांड नामों के इस्तेमाल, पैकेजिंग, लेबलिंग और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है।

सफाई केमिकल के नाम पर रखा मिला संदिग्ध फ्लेवर

निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर में एक संदिग्ध फ्लेवर भी बरामद हुआ। विभाग के अनुसार, इसे कथित तौर पर सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के नाम पर रखा गया था। टीम ने फ्लेवर के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। घी में कृत्रिम सुगंध के इस्तेमाल और संभावित मिलावट की आशंका को देखते हुए कच्चे माल तथा निर्माण प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। मौके पर खाद्य लाइसेंस भी प्रदर्शित नहीं मिला। हालांकि, घी की वास्तविक गुणवत्ता और फ्लेवर के इस्तेमाल की पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

मोरीजा और चीथवाड़ी में भी खाद्य सुरक्षा टीम की कार्रवाई

इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने चौमूं क्षेत्र के मोरीजा और चीथवाड़ी में भी तड़के करीब 3:30 बजे औचक निरीक्षण किया। टीम ने डेयरी और मावा निर्माण इकाइयों के साथ गोदामों की जांच की। इस दौरान दूध की प्रोसेसिंग, मावा बनाने की प्रक्रिया, साफ-सफाई, कच्चे माल की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। विभाग ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से मावा और दूध के प्रवर्तन तथा सर्विलांस नमूने भी एकत्र किए।

पाउडर से मावा बनाने की प्रक्रिया जांच के दायरे में

निरीक्षण के दौरान एक निजी प्रतिष्ठान में पाउडर से मावा तैयार किए जाने की प्रक्रिया भी सामने आई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को जांच के दायरे में लिया है। टीम ने संबंधित प्रतिष्ठान से नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे माल की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं। इसके अलावा अन्य डेयरी इकाइयों में भी स्वच्छता और भंडारण संबंधी व्यवस्थाओं की जांच की गई।

लैब रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, घी, फ्लेवर, मावा और दूध के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जा रही है। साथ ही फैक्ट्री में मिले दस्तावेजों और ब्रांड नामों के इस्तेमाल की वैधता का सत्यापन भी किया जाएगा। जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल फैक्ट्री को सीज कर दिया गया है। विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त घी में मिलावट थी या नहीं और संबंधित ब्रांडों के नामों का इस्तेमाल वैध तरीके से किया जा रहा था या नहीं।

प्रशासन का पक्ष

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