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राजस्थान में पेड़ों की होगी जियो-टैगिंग, अवैध कटाई पर सख्ती; 25 से ज्यादा पेड़ों के प्रस्तावों की होगी जांच

राजस्थान में पेड़ों की सुरक्षा और अवैध कटाई रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। प्रदेशभर में पेड़ों की गणना और जियो-टैगिंग कराने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, 25 से अधिक पेड़ों की कटाई के प्रस्तावों की उच्चस्तरीय समिति जांच करेगी। पेड़ों को बचाने के विकल्प तलाशने और क्षतिपूरक पौधरोपण पर भी जोर दिया गया है। यह आदेश जयपुर के चौमूं हाउस पार्क में करीब 800 पेड़ों की कथित कटाई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया।

राजस्थान में पेड़ों की होगी जियो-टैगिंग
फोटो: STV NEWS

मुख्य बातें

  • राजस्थान में हर पेड़ की होगी जियो-टैगिंग, NGT के सख्त निर्देश
  • पेड़ काटने से पहले होगी जांच, 25 से ज्यादा पेड़ों पर कमेटी की नजर
  • 800 पेड़ों की कथित कटाई का मामला, NGT ने मांगी छह सप्ताह में रिपोर्ट

JAIPUR, 03 NOV. 2026:

राजस्थान में पेड़ों की गणना और जियो-टैगिंग के निर्देश

एनजीटी ने प्रदेश के शहरों और जिलों में पेड़ों की गणना कराने तथा उनकी जियो-टैगिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य पेड़ों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना और उनकी निगरानी को मजबूत बनाना है। प्रस्तावित रिकॉर्ड में पेड़ की लोकेशन, प्रजाति और संख्या जैसी जानकारी शामिल होगी। निर्देशों के अनुसार, यह रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के साथ मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से भी साझा किया जाएगा। गणना की निगरानी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) या उनके नामित अधिकारी करेंगे।

25 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के प्रस्तावों की होगी जांच

एनजीटी ने 25 से अधिक पेड़ों की कटाई के प्रस्तावों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। समिति प्रस्तावित कटाई की जरूरत और औचित्य की जांच करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित पेड़ों को बचाने के दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं या नहीं। कटाई की अनुमति की सिफारिश करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव और पेड़ों के संरक्षण की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

पेड़ काटने पर क्षतिपूरक पौधरोपण, 10 से 100 गुना तक का विकल्प

निर्देशों में पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने पर क्षतिपूरक पौधरोपण का प्रावधान भी शामिल है। स्थानीय परिस्थितियों और जमीन की उपलब्धता के आधार पर काटे गए पेड़ों की संख्या से 10 से 100 गुना तक पौधे लगाने के विकल्प पर विचार किया जाएगा। हालांकि, इसे हर मामले में स्वतः लागू होने वाला एक निश्चित अनुपात नहीं माना जाना चाहिए। पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल भी जरूरी होगी। लगाए गए पौधों के जीवित रहने और विकास की निगरानी कम से कम पांच साल तक करनी होगी।

जिला कलेक्टरों की भूमिका बढ़ी, अवैध कटाई पर कार्रवाई के निर्देश

एनजीटी ने जिला कलेक्टरों की सक्षम अनुमति के बिना पेड़ काटने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को अवैध कटाई के मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इन निर्देशों का उद्देश्य पेड़ों की कटाई पर प्रशासनिक निगरानी मजबूत करना है। हालांकि, किसी विशेष परियोजना में अनुमति की प्रक्रिया और लागू नियमों की स्थिति संबंधित आदेश तथा कानूनी प्रावधानों के अनुसार देखी जाएगी। अवैध कटाई के मामलों में जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी।

पुराने पेड़ों की भरपाई में लग सकते हैं कई दशक

ट्रिब्यूनल ने पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करते समय विकसित पेड़ों के महत्व पर भी ध्यान दिलाया। आदेश में कहा गया कि पुराने और विकसित पेड़ों से खोई हरियाली दोबारा तैयार होने में 70 से 100 साल तक लग सकते हैं। इसलिए पेड़ों के नुकसान का आकलन केवल उनकी संख्या से नहीं होना चाहिए। उनके विकास में लगे समय और पर्यावरणीय योगदान को भी ध्यान में रखना जरूरी है। यह पहलू शहरी विकास परियोजनाओं में पेड़ों के संरक्षण और वैकल्पिक योजना की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

चौमूं हाउस पार्क मामले में छह सप्ताह में रिपोर्ट

एनजीटी ने जयपुर के सी-स्कीम स्थित चौमूं हाउस पार्क में पेड़ों की कथित कटाई की जांच के लिए संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर जिला कलेक्टर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि शामिल होंगे। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल समिति की नोडल एजेंसी होगी। समिति मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट में अब तक की कार्रवाई का विवरण भी शामिल करना होगा।

करीब 800 पेड़ों की कथित कटाई को लेकर आवेदन

आवेदक अनिल कुमार शर्मा ने राजस्थान सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ आवेदन में चौमूं हाउस पार्क में करीब 800 विकसित पेड़ों की कथित कटाई का मुद्दा उठाया। आवेदन में आरोप लगाया गया कि पेड़ों को जरूरी वैधानिक अनुमति के बिना काटा जा रहा था। याचिका के अनुसार, जमीन का आवंटन मूल रूप से ठाकुर राज सिंह ने किया था और वर्ष 1960 से इसका इस्तेमाल सार्वजनिक पार्क के रूप में हो रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ अनधिकृत लोगों ने जेडीए की चारदीवारी तोड़कर कटाई शुरू की। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित रिकॉर्ड से होनी बाकी है।

अगली सुनवाई 16 दिसंबर को

एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने 2 नवंबर को मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को निर्धारित बताई गई है। संयुक्त समिति की रिपोर्ट और संबंधित विभागों की कार्रवाई आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण हो सकती है। चौमूं हाउस पार्क का मामला अब शहरी हरियाली, सार्वजनिक स्थानों के संरक्षण और पेड़ों की कटाई से जुड़े सवालों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

प्रशासन का पक्ष

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