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श्रीगंगानगर सभापति चुनाव में BJP की अंदरूनी खींचतान, अजय दावड़ा के सामने संजय मूंदड़ा

श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति पद को लेकर भाजपा के भीतर खींचतान सामने आई है। 65 सदस्यीय परिषद में भाजपा के 30 पार्षद हैं, जबकि बहुमत के लिए 33 का आंकड़ा जरूरी है। पार्टी की ओर से अजय दावड़ा के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश के बीच संजय मूंदड़ा ने भी सभापति पद के लिए नामांकन फार्म भर दिया है। इससे भाजपा के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने और तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाने की चुनौती बढ़ गई है। वहीं कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

अजय दावड़ा के नाम के बाद बढ़ी अंदरूनी हलचल

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव के परिणाम के बाद भाजपा में सभापति पद के लिए डॉ. भरतपाल मय्यर, संजय मूंदड़ा और अजय दावड़ा के नाम चर्चा में थे। तीनों ने नामांकन फार्म लिए थे।

बुधवार को अजय दावड़ा के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर असहमति की चर्चा शुरू हो गई। भाजपा नेता अशोक चांडक ने भी नाम तय होने के बाद पेच फंसने की बात कही है।

इसी बीच संजय मूंदड़ा ने सभापति पद के लिए नामांकन फार्म भर दिया। इससे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के सामने उनकी दावेदारी ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

30 पार्षदों वाली BJP को चाहिए तीन और समर्थन

श्रीगंगानगर नगर परिषद में कुल 65 पार्षद हैं। चुनाव परिणाम के अनुसार भाजपा के 30, कांग्रेस के 17 और निर्दलीयों के 18 पार्षद हैं।

सभापति पद के चुनाव में बहुमत के लिए भाजपा को 33 पार्षदों का समर्थन चाहिए। यानी पार्टी को अपने 30 पार्षदों के अलावा कम से कम तीन और पार्षदों का साथ जुटाना होगा।

संख्या के लिहाज से भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने है। हालांकि, सभापति पद को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद रहने पर समर्थन जुटाने की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

विधायक खेमे की पसंद माने जा रहे अजय दावड़ा

राजनीतिक हलकों में अजय दावड़ा को विधायक जयदीप बिहाणी के खेमे की पसंद माना जा रहा है। दावड़ा को विधायक के करीबी नेताओं में गिना जाता है।

दावड़ा के नामांकन के दौरान विधायक जयदीप बिहाणी की मौजूदगी भी रही। दूसरी ओर भाजपा नेता अशोक चांडक के खेमे से भरतपाल मय्यर और संजय मूंदड़ा के नामों की चर्चा रही थी।

भरतपाल मय्यर नामांकन नहीं भर सके, जबकि मूंदड़ा ने फार्म भर दिया। ऐसे में अब भाजपा के भीतर अलग-अलग नेताओं की पसंद और प्रभाव का मुद्दा भी सभापति चुनाव में महत्वपूर्ण हो गया है।

संजय मूंदड़ा के नामांकन से बदला समीकरण

अजय दावड़ा के नाम की घोषणा के बाद संजय मूंदड़ा का नामांकन भाजपा के लिए नई चुनौती के तौर पर सामने आया है। अब चर्चा इस बात की है कि मूंदड़ा अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरते हैं या नहीं।

यदि ऐसा होता है तो भाजपा के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति नामांकन वापसी और चुनाव प्रक्रिया के अगले चरण में स्पष्ट होगी।

कांग्रेस के 17 पार्षद भी बन सकते हैं अहम

कांग्रेस के पास 17 पार्षद हैं। वह अपने दम पर बहुमत हासिल करने की स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद भाजपा के भीतर मतभेद की स्थिति में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

वहीं 18 निर्दलीय पार्षद सभापति चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा को बहुमत के लिए तीन अतिरिक्त समर्थन चाहिए। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और समर्थन जुटाने की कोशिशें चुनावी समीकरण का अहम हिस्सा बन सकती हैं।

इन प्रत्याशियों ने भरे नामांकन

सभापति पद के लिए भाजपा की ओर से अजय दावड़ा, सन्नी नागपाल, संजय प्रकाश और गौरव मित्तल के नामांकन की जानकारी सामने आई है।

संजय प्रकाश ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस की ओर से सुशील चावला और अनूप बाजवा ने पर्चा भरा है। दोनों ने निर्दलीय के रूप में भी नामांकन जमा कराया है।

इसके अलावा दयाराम ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।

21 सितंबर को होगा सभापति का चुनाव

श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति पद का चुनाव 21 सितंबर को होना है। इससे पहले राजनीतिक दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने और जरूरी समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।

अब देखना होगा कि भाजपा अपने 30 पार्षदों के साथ तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटा पाती है या नहीं। साथ ही, संजय मूंदड़ा की दावेदारी आगे किस रूप में सामने आती है, इस पर भी नजर रहेगी।

सभापति चुनाव में भाजपा की अंदरूनी सहमति, कांग्रेस की रणनीति और निर्दलीय पार्षदों का रुख श्रीगंगानगर नगर परिषद के बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकता है।

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