ऑनलाइन गेमिंग स्कैम: 3,000 करोड़ के लेनदेन की जांच के बीच सागर दास गिरफ्तार, ED को मिली 3 दिन की कस्टडी

नई दिल्ली। ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के नाम पर साइबर ठगी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और आरोपी सागर दास को गिरफ्तार किया है। ED के मुंबई जोनल ऑफिस-2 ने 27 अक्टूबर 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई की। आरोपी को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन की ED कस्टडी में भेज दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, ऑल पैनल एक्सचेंज (APX) से जुड़े कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। मामले में पहले छह शहरों में छापेमारी कर करीब 9 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं।
ऑल पैनल एक्सचेंज से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई
यह मामला ऑल पैनल एक्सचेंज (APX) के जरिए संचालित कथित ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म तथा साइबर ठगी से जुड़ा है। ED ने इस संबंध में दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।इन मामलों में शिकायतकर्ताओं को ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग और साइबर फ्रॉड के जरिए करोड़ों रुपये का नुकसान होने की शिकायत की गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कथित वित्तीय नेटवर्क और उसमें इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की पड़ताल की।इसी जांच के आधार पर सागर दास को गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने पूछताछ के लिए ED को तीन दिन की हिरासत दी है।
म्यूल बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करने का आरोप
ED की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम को कथित तौर पर कई म्यूल बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। इसके लिए हैदराबाद स्थित जुबली हिल्स मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के कुछ खातों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।जांच एजेंसी के अनुसार, इन खातों से रकम आगे कई शेल कंपनियों के बैंक खातों में भेजी गई। इस तरह कथित तौर पर अलग-अलग खातों और संस्थाओं के जरिए पैसों के लेनदेन की परतें बनाई गईं।ED अब इन खातों, कंपनियों और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य ठगी से प्राप्त धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाना है।
बेंगलुरु की सहकारी संस्था के खाते में पहुंची बड़ी रकम
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि शेल कंपनियों के खातों से बड़ी रकम बेंगलुरु की नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के नोडल खाते में ट्रांसफर की गई। यह खाता सागर दास की ओर से स्थापित आर्मस्ट्रॉन्ग एक्सचेंज प्राइवेट लिमिटेड के लिए संचालित किया जा रहा था।ED के मुताबिक, इस खाते के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का कितना हिस्सा कथित ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ा था तथा इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
KYC और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप
ED की जांच के अनुसार, सागर दास ने नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के KYC और कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर क्रिप्टो अकाउंट खुलवाया था। एजेंसी का आरोप है कि इस खाते के जरिए सहकारी संस्था के बैंक खाते से बड़ी रकम का लेनदेन किया गया।जांच में यह भी देखा जा रहा है कि डिजिटल करेंसी के माध्यम से रकम का हस्तांतरण किस तरह किया गया और इस प्रक्रिया में किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका थी। इन आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
छह शहरों में छापेमारी, करीब 9 करोड़ रुपये फ्रीज
इस मामले में ED पहले भी छह शहरों में कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। इनमें पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत और गुजरात का मेहसाणा शामिल हैं।छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की थी। इसके अलावा, अलग-अलग बैंक खातों में जमा करीब 9 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।इससे पहले ED ने एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के CEO राम यू. रामधानी को भी गिरफ्तार किया था। अब सागर दास की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है।
साइबर ठगी की रकम और ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क की जांच जारी
ED की जांच का मुख्य फोकस कथित साइबर ठगी से प्राप्त रकम, उसके बैंक खातों के जरिए हुए हस्तांतरण और ऑनलाइन गेमिंग-बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े नेटवर्क पर है।सागर दास से पूछताछ में खातों के संचालन, कंपनियों के बीच लेनदेन और कथित क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जुड़े सवालों के जवाब जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।फिलहाल ED की जांच जारी है। आने वाले दिनों में पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल से कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आने की संभावना है।
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