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लद्दाख चुनाव से पहले करगिल में सियासी हलचल, पूर्व NC नेता जाफर अखून BJP में शामिल

करगिल। लद्दाख में 21 नवंबर को प्रस्तावित पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले करगिल की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से निष्कासित पूर्व हिल काउंसिल प्रमुख मोहम्मद जाफर अखून शनिवार, 31 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। वहीं, पूर्व अधिकारी रजा अब्बासी और सामाजिक कार्यकर्ता फिदा हुसैन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। नेताओं के दल बदलने से स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

NC से निष्कासित होने के बाद BJP में शामिल हुए जाफर अखून

मोहम्मद जाफर अखून पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वह लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC), करगिल के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) रह चुके हैं। 18 जुलाई 2026 को NC ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। अखून के भाजपा में शामिल होने से करगिल में पार्टी को एक जाना-पहचाना स्थानीय चेहरा मिला है। हालांकि, उनके पार्टी बदलने का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, यह मतदाताओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से स्पष्ट होगा।

रजा अब्बासी और फिदा हुसैन कांग्रेस में शामिल

करगिल में कांग्रेस को भी दो नए नेताओं का साथ मिला है। पूर्व डायरेक्टर ऑफ शीप एंड एनिमल हसबेंडरी रजा अब्बासी और सामाजिक कार्यकर्ता फिदा हुसैन कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण की। रजा अब्बासी पूर्व विधायक हाजी अब्बास के बेटे हैं। वहीं, फिदा हुसैन चंचिक क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता बताए गए हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनके जुड़ने से करगिल में संगठनात्मक संपर्क मजबूत होंगे।

21 नवंबर को प्रस्तावित हैं पंचायत और नगर निकाय चुनाव

लद्दाख में 21 नवंबर को पंचायत और नगर निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले क्षेत्र के राजनीतिक दल संगठन मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुटे हैं। ऐसे में प्रमुख नेताओं के दल बदलने को स्थानीय चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन चुनावों से पहले करगिल में भाजपा और कांग्रेस दोनों को नए राजनीतिक चेहरे मिले हैं। अब यह देखना होगा कि ये बदलाव चुनाव प्रचार और स्थानीय स्तर पर दलों की रणनीति में किस तरह दिखाई देते हैं।

हिल काउंसिल के घटनाक्रम के बीच बदले राजनीतिक समीकरण

जाफर अखून का भाजपा में शामिल होना करगिल हिल काउंसिल में पिछले कुछ महीनों से जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद हुआ है। NC और कांग्रेस के बीच 2023 में हुए सत्ता-साझेदारी समझौते के तहत CEC का पद ढाई साल बाद कांग्रेस को सौंपा जाना था। लेकिन अखून ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़े और कांग्रेस ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की। अक्टूबर में परिषद के विघटन और नए जिलों के गठन से जुड़े प्रशासनिक बदलावों के बीच करगिल की राजनीति में नए समीकरण बने हैं। ऐसे में अखून का भाजपा में जाना और दो प्रमुख चेहरों का कांग्रेस में शामिल होना आगामी चुनावों से पहले महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

करगिल की राजनीति में आगे क्या होगा?

करगिल में दल बदलने की इन घटनाओं के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगी। हालांकि, नेताओं के पार्टी में शामिल होने से चुनावी नतीजों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वास्तविक स्थिति मतदान और आधिकारिक परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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Stv News Rajasthan

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