श्रीगंगानगर में छात्रा से छेड़छाड़ और मारपीट का मामला, हॉस्टल संचालक को डेढ़ साल की सजा
श्रीगंगानगर। डॉ. राधाकृष्णन गर्ल्स कॉलेज एवं हॉस्टल के संचालक डॉ. केएल यादव को छात्रा से छेड़छाड़ और मारपीट के करीब पांच साल पुराने मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है। श्रीगंगानगर की विशिष्ट न्यायाधीश महिला अत्याचार एवं उत्पीड़न डॉ. सरिता स्वामी ने 28 सितंबर को फैसला सुनाया।अदालत ने डॉ. यादव को अलग-अलग धाराओं में डेढ़-डेढ़ साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। धारा 323 के तहत भी एक साल के साधारण कारावास की सजा दी गई। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए हैं।
तीन धाराओं में डेढ़-डेढ़ साल की सजा
पीड़िता के अधिवक्ता जितेंद्र पाराशर के अनुसार अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354 (क) और 354 (क) (द्वितीय) के तहत दोषी को डेढ़-डेढ़ साल के कारावास की सजा सुनाई।इन तीनों धाराओं में 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना जमा नहीं कराने पर प्रत्येक धारा में दो-दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।इसके अलावा धारा 323 के तहत एक वर्ष के साधारण कारावास और एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया।
आरोपी पहले ही करीब 20 महीने जेल में रह चुका
पीड़िता के अधिवक्ता के मुताबिक मामले की सुनवाई के दौरान डॉ. केएल यादव करीब 20 महीने न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं।यह अवधि अदालत द्वारा सुनाई गई डेढ़ साल की सजा से अधिक बताई गई है। फैसला सुनाए जाने के समय डॉ. यादव जमानत पर थे। मामले में अदालत के फैसले के बाद सजा और पूर्व न्यायिक हिरासत की अवधि को लेकर कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
2017 से हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी छात्रा
मामला वर्ष 2021 में दर्ज हुआ था। पीड़िता मूल रूप से हरियाणा के सिरसा जिले की रहने वाली थी। वह वर्ष 2017 से श्रीगंगानगर के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।पीड़िता के बयान के अनुसार घटना के दिन डॉ. यादव उसे लक्ष्मीनगर स्थित पुराने भवन इंडियन एकेडमी में एसी चेक करवाने के बहाने लेकर गए थे।आरोप था कि भवन में पहुंचने के बाद डॉ. यादव ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। इसके बाद छात्रा के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की गई। छात्रा किसी तरह वहां से बाहर निकली और हॉस्टल पहुंची।
छात्रा ने सहेलियों को बताई घटना
हॉस्टल पहुंचने के बाद छात्रा ने अपनी सहेलियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामले की जानकारी परिवार तक पहुंची।परिजनों के श्रीगंगानगर पहुंचने के बाद छात्रा अपने पिता के साथ महिला थाने पहुंची। वहां 31 अगस्त 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने जांच के बाद पेश किया चालान
रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 376/511 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था।पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए।अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों का परीक्षण करने के बाद डॉ. केएल यादव को संबंधित धाराओं में दोषी माना और सजा सुनाई।
पांच साल पुराने मामले में आया फैसला
मामले की शुरुआत वर्ष 2021 में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसके बाद अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। अब करीब पांच साल पुराने मामले में फैसला सामने आया है।अदालत के फैसले के बाद पीड़िता पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण राहत मिली है। वहीं मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित पक्षों की ओर से अपनाई जा सकती है।