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श्रीगंगानगर में गंगनहर में बहकर आए कचरे और मृत जानवरों के शव, पेयजल सुरक्षा पर उठे सवाल

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में गंगनहर में पंजाब की ओर से भारी मात्रा में कचरा और मृत जानवरों के शव बहकर आने का मामला सामने आया है। इससे किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। गंगनहर क्षेत्र की खेती के साथ लाखों लोगों की पेयजल जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में नहर में कचरा और शव मिलने से पानी की गुणवत्ता तथा जनस्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसान संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेता अमरसिंह बिश्नोई ने मामले पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। जल संसाधन विभाग ने मौके की जांच कराने की बात कही है। हालांकि, कचरे के स्रोत और पानी पर इसके वास्तविक प्रभाव की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

गंगनहर में कचरा और मृत जानवरों के शव मिलने से चिंता

श्रीगंगानगर की गंगनहर में एक बार फिर बड़ी मात्रा में कचरा और मृत जानवरों के शव मिलने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नहर में आया कचरा किसी स्थान पर एकत्र किए गए कचरे के ढेर जैसा दिखाई देता है। इसके साथ आवारा कुत्तों के शव भी पानी में बहते नजर आए।इस घटना के बाद किसानों और आसपास के निवासियों ने चिंता जताई है। गंगनहर सिंचाई के साथ पेयजल आपूर्ति के लिए भी अहम है। ऐसे में नहर में ठोस कचरा और मृत जानवर मिलने से पानी की स्वच्छता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

किसान संघर्ष समिति ने जताई नाराजगी

किसान संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेता अमरसिंह बिश्नोई ने घटना पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि नहर में मिला कचरा पंजाब क्षेत्र में नहर के आसपास जमा किए गए कचरे से आया हो सकता है।बिश्नोई के मुताबिक, घटना की सूचना जल संसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी गंगनहर में मरी हुई मुर्गियों और अन्य पशुओं के शव मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि, मौजूदा मामले में कचरे और शवों के स्रोत की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य को लेकर सवाल

गंगनहर श्रीगंगानगर क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए इसमें कचरा या मृत जानवरों के शव मिलने की घटनाएं स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा करती हैं।मृत जानवरों के सड़ने से पानी में रोगाणु फैलने का जोखिम हो सकता है। वहीं, कचरे में मौजूद पदार्थ भी पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इस घटना के कारण पानी में किसी खास प्रदूषक की मौजूदगी या स्थानीय बीमारियों में बढ़ोतरी की पुष्टि के लिए जल गुणवत्ता जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े जरूरी हैं।स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पानी की जांच कराई जाए और यदि प्रदूषण की पुष्टि हो, तो पेयजल सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

2024 और 2026 में भी सामने आई थीं ऐसी घटनाएं

स्थानीय स्तर पर पहले भी गंगनहर में मृत मुर्गियां और अन्य कचरा मिलने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

  • 29 मई 2024: गंगनहर में बड़ी संख्या में मरी हुई मुर्गियों के शव मिलने की घटना सामने आई थी। उस समय तत्कालीन जिला कलेक्टर लोकबंधु ने पंजाब के फाजिल्का जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।
  • 20 मई 2026: नहर में दोबारा मुर्गियों के शव मिलने के बाद जल संसाधन विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता धीरज चावला ने पंजाब सिंचाई विभाग, फिरोजपुर के अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी।

इन घटनाओं के बाद भी ऐसी शिकायत दोबारा सामने आने से स्थानीय लोगों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई है। पूर्व घटनाओं में की गई कार्रवाई और मौजूदा मामले की स्थिति का आधिकारिक विवरण सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

जल संसाधन विभाग ने जांच का आश्वासन दिया

श्रीगंगानगर जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव वर्मा के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिशासी अभियंता को मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं।जांच में कचरे की प्रकृति और उसके संभावित स्रोत का पता लगाया जाएगा। वर्मा के मुताबिक, यदि जांच में पुष्टि होती है कि कचरा और मृत जानवरों के शव पंजाब की ओर से बहकर आए हैं, तो पंजाब सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।फिलहाल, नहर में मिले कचरे की मात्रा, उसके स्रोत और पानी की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन होना बाकी है।

पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों के बीच समन्वय की मांग

स्थानीय निवासियों और किसानों ने राज्य सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कचरा दूसरे राज्य से नहर में छोड़ा जा रहा है, तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय कर ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय किए जाने चाहिए।नहर की नियमित निगरानी, कचरे के स्रोत की पहचान और जल गुणवत्ता की जांच इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। साथ ही, यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।

गंगनहर की स्वच्छता और पेयजल सुरक्षा पर निगाहें

गंगनहर में कचरा और मृत जानवरों के शव मिलने की ताजा शिकायत ने नहर की स्वच्छता और पेयजल सुरक्षा पर फिर ध्यान खींचा है। किसानों और स्थानीय लोगों को अब विभागीय जांच तथा आगे की कार्रवाई का इंतजार है।मामले की पूरी तस्वीर कचरे के स्रोत, जल गुणवत्ता की रिपोर्ट और संबंधित विभागों की जांच के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल, स्थानीय लोगों की मांग है कि नहर में कचरा आने की घटनाओं को रोकने और पेयजल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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Stv News Rajasthan

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