सड़कें खराब, डामर की कीमतों में 150% उछाल, ₹1100 करोड़ के सड़क टेंडर अटके
राजस्थान में डामर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का असर अब सड़क निर्माण और रखरखाव कार्यों पर दिखाई देने लगा है। राज्य सड़क विकास निगम (RSRDC) की 16 टोल सड़कों के नवीनीकरण और रखरखाव से जुड़े 1100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर अटक गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डामर की कीमतों में करीब 150 प्रतिशत तक उछाल आने से टेंडर निर्धारित दरों से 26 प्रतिशत तक महंगे आए हैं। दूसरी ओर, बारिश के बाद कई स्टेट हाईवे की हालत खराब है। वाहन चालकों को सड़क की बदहाली के बावजूद पूरा टोल चुकाना पड़ रहा है।

मुख्य बातें
- ₹1100 करोड़ के सड़क टेंडर अटके, खराब सड़कों पर पूरा टोल
- राजस्थान में डामर महंगा, 16 स्टेट हाईवे के टेंडर अटके
- 30 किलोमीटर का सफर एक घंटे में, टोल सड़कें बदहाल
RAJASTHAN,02 NOV. 2026:
डामर की कीमतों में उछाल से सड़क परियोजनाओं पर असर
राजस्थान में डामर की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी ने सड़क नवीनीकरण की योजनाओं को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का असर निर्माण क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। डामर महंगा होने से सड़क निर्माण और मरम्मत की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम के टेंडरों पर दिखाई दे रहा है। निगम की 16 टोल सड़कों के रखरखाव और नवीनीकरण के लिए जारी टेंडरों में निर्धारित लागत के मुकाबले काफी अधिक दरें सामने आई हैं।
1100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर अटके
सड़क नवीनीकरण से जुड़े 16 स्टेट हाईवे के टेंडरों की लागत 1100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। लेकिन डामर के मौजूदा बाजार भाव के कारण ठेकेदारों ने निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर निविदाएं पेश की हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ टेंडरों की दरें निर्धारित लागत से 26 प्रतिशत तक ज्यादा आई हैं। ऐसे में इन टेंडरों पर अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा है। इसका असर सड़कों के नियमित रखरखाव और बड़े स्तर पर नवीनीकरण के काम पर पड़ने की आशंका है।
खस्ताहाल सड़कों पर भी वाहन चालकों से पूरा टोल
एक ओर सड़क सुधार के टेंडर अटके हुए हैं, वहीं दूसरी ओर वाहन चालकों को खराब सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। बारिश के बाद प्रदेश के कई स्टेट हाईवे और अन्य मार्गों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से सामने आए हैं। इसके बावजूद टोल सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों को निर्धारित टोल राशि चुकानी पड़ रही है। खराब सड़कें सफर का समय बढ़ा रही हैं। साथ ही वाहनों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में वाहन चालकों के बीच सड़क सुविधाओं और टोल वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
30 किलोमीटर का सफर तय करने में लग रहा एक घंटा
खराब सड़कों के कारण कई मार्गों पर वाहनों की रफ्तार प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, महुआ-हिंडौन टोल सड़क पर करीब 30 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग रहा है। बारिश के बाद सड़क की खराब स्थिति से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के दूसरे टोल वाले स्टेट हाईवे पर भी ऐसी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। सड़क की खराब हालत के कारण रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का समय और वाहन संचालन का खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
इन स्टेट हाईवे की सड़कों पर भी नवीनीकरण का असर
रिपोर्ट में जिन प्रमुख टोल सड़कों का उल्लेख किया गया है, उनमें कई महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों पर रखरखाव और नवीनीकरण के काम प्रभावित होने की बात सामने आई है।
- चौमूं-महला
- डबोक-मावली-कपासन-चित्तौड़गढ़
- धीर की चौकी-सलूंबर
- हनुमानगढ़-सूरतगढ़
- महुआ-हिंडौन
इन मार्गों पर सड़क की स्थिति और मरम्मत कार्यों को लेकर वाहन चालकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, इन पांच सड़कों की सूची 16 टेंडरों की पूरी सूची नहीं है।
6. पेचवर्क के टेंडर भी नहीं ले रहे संवेदक
नवीनीकरण के बड़े टेंडर अटकने के बाद अधिकारियों ने अलग-अलग टोल सेक्शन पर सड़क की स्थिति सुधारने के लिए पेचवर्क के टेंडर जारी किए। इसका उद्देश्य खस्ताहाल हिस्सों की अस्थायी मरम्मत कराना था। लेकिन डामर की बढ़ी हुई कीमतों के कारण संवेदक इन छोटे कामों के टेंडर लेने में भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में सड़क सुधार की प्रक्रिया और मुश्किल हो गई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वाहन चालकों को खराब सड़कों पर सफर करने की परेशानी जारी रह सकती है।
7. सड़क सुधार और टोल व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
राजस्थान में सड़क निर्माण की बढ़ती लागत ने सरकार और सड़क विकास एजेंसियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ निर्माण सामग्री महंगी होने से ठेकेदार निर्धारित दरों पर काम करने से पीछे हट रहे हैं। दूसरी तरफ वाहन चालकों को खराब सड़कों के बावजूद टोल देना पड़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लंबित टेंडरों के समाधान के साथ जरूरी मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। वाहन चालकों को बेहतर सड़क सुविधा मिले, इसके लिए सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
प्रशासन का पक्ष
कोई पक्ष सामने नहीं आया है
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