पाली में दो भाई-बहनों के शरीर में अंगों की उलटी स्थिति, दुर्लभ बीमारी की आशंका
राजस्थान के पाली में दो भाई-बहनों की जांच के दौरान शरीर के भीतर अंगों की असामान्य स्थिति सामने आई। दोनों बच्चों का दिल सामान्य स्थिति से उलट दाईं ओर और लिवर बाईं ओर मिला। वे खांसी, सांस लेने में परेशानी और बार-बार निमोनिया होने की शिकायत लेकर बांगड़ चिकित्सालय पहुंचे थे। जांच के बाद चिकित्सकों ने प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया और कार्टाजेनर सिंड्रोम की आशंका जताई। आगे की जांच और जेनेटिक काउंसलिंग के लिए दोनों को एम्स जोधपुर भेजा गया है।

मुख्य बातें
- पाली में दो भाई-बहनों के शरीर में अंगों की उलटी व्यवस्था, डॉक्टर हैरान
- दोनों बच्चों का दिल दाईं ओर, लिवर बाईं तरफ; एम्स में होगी जांच
- बचपन से खांसी और निमोनिया, जांच में सामने आई अंगों की असामान्य स्थिति
PALI, 03 NOV. 2026:
खांसी और निमोनिया की जांच में सामने आया दुर्लभ मामला
पाली के बांगड़ चिकित्सालय में 25 अक्टूबर को 13 साल की बालिका और उसका 10 वर्षीय भाई परिजनों के साथ जांच कराने पहुंचे थे। दोनों को लंबे समय से श्वसन संबंधी परेशानियां थीं। खासकर भाई को बचपन से खांसी, सांस लेने में दिक्कत और बार-बार निमोनिया होने की शिकायत थी। चिकित्सकों ने दोनों बच्चों की जांच शुरू की। इस दौरान उनकी बीमारी के साथ शरीर के आंतरिक अंगों की स्थिति भी असामान्य दिखाई दी। इसके बाद डॉक्टरों ने विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया।
सीटी स्कैन और सोनोग्राफी में उलटी मिली अंगों की स्थिति
चिकित्सकों ने दोनों बच्चों का सीटी स्कैन और पेट की सोनोग्राफी सहित आवश्यक परीक्षण करवाए। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों का दिल सामान्य स्थिति के विपरीत दाईं ओर है। वहीं, लिवर बाईं ओर मौजूद है। चिकित्सा विज्ञान में अंगों की इस तरह की उलटी व्यवस्था को ‘साइटस इनवर्सस’ कहा जाता है। यह एक दुर्लभ शारीरिक स्थिति है। दोनों भाई-बहनों में एक जैसी स्थिति मिलने के बाद डॉक्टरों ने इसके संभावित आनुवंशिक कारणों की जांच पर ध्यान केंद्रित किया।
क्या है कार्टाजेनर सिंड्रोम और प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया?
प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया एक दुर्लभ, आमतौर पर आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर की कोशिकाओं पर मौजूद सूक्ष्म बाल जैसी संरचनाएं यानी सिलिया ठीक से काम नहीं करतीं। ये सिलिया सांस की नलियों से बलगम और धूल के कणों को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनके प्रभावित होने पर बचपन से लगातार खांसी, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण, नाक बहना और साइनस की समस्या हो सकती है। कुछ मरीजों में समय के साथ फेफड़ों की नलियों में स्थायी फैलाव यानी ब्रोंकिएक्टेसिस भी हो सकता है। साइटस इनवर्सस के साथ यह स्थिति मिलने पर इसे कार्टाजेनर सिंड्रोम कहा जाता है।
जेनेटिक काउंसलिंग के लिए एम्स जोधपुर भेजे गए बच्चे
दोनों बच्चों में लगातार श्वसन संबंधी परेशानी और साइटस इनवर्सस मिलने के बाद चिकित्सकों ने प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया की संभावना पर विचार किया। हालांकि, केवल लक्षणों और अंगों की स्थिति के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन और जरूरी जांचें आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से दोनों भाई-बहनों को जेनेटिक काउंसलिंग और आगे की जांच के लिए एम्स जोधपुर भेजा गया है।
डॉक्टर ने क्या बताया?
मेडिकल कॉलेज पाली के पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सोनी के अनुसार, बचपन से लगातार खांसी, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण और साइटस इनवर्सस का एक साथ मिलना प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया की जांच की जरूरत दर्शाता है। उन्होंने बताया कि बालिका सहित दोनों बच्चों में अंतिम निदान के लिए आवश्यक परीक्षण और विशेषज्ञों का मूल्यांकन जरूरी है। आगे की जांच के बाद ही बीमारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन का पक्ष
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