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अजबगढ़ रिसॉर्ट की विशेष रियायतों पर रोक, ACB जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगा लाभ

अजबगढ़ रिसॉर्ट से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद और गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए विशेष निवेश पैकेज का मामला अब जांच के दायरे में है। सरकार ने कंपनी को स्वीकृत राजकीय रियायतों के वितरण पर रोक लगा दी है। यह रोक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेगी। वहीं, आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर को भी कार्मिक विभाग ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

एसीबी कार्यालय

मुख्य बातें

  • अजबगढ़ रिसॉर्ट की रियायतों पर रोक, ACB जांच तक थमेगा लाभ
  • राजस्थान में निवेश पैकेज विवाद, ACB जांच पूरी होने तक रियायतें बंद
  • गोयल फैशंस को मिले विशेष पैकेज पर रोक, अधिकारियों को नोटिस

JAIPUR, 03 NOV. 2026:

अजबगढ़ रिसॉर्ट मामले में सरकार का बड़ा फैसला

राजस्थान सरकार ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत निवेश प्रोत्साहन और अन्य राजकीय रियायतों के वितरण पर रोक लगा दी है। उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त कार्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। कंपनी को राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम-2019 के तहत विशेष पैकेज मंजूर किया गया था। अब एसीबी की जांच पूरी होने तक कंपनी इन प्रोत्साहनों और छूटों का लाभ नहीं ले सकेगी। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उठाया गया कदम बताई गई है।

40 विला-कॉटेज की खरीद से जुड़ा मामला

मामला अजबगढ़ रिसॉर्ट में विला खरीद और कंपनी को मिले विशेष पैकेज के बीच सामने आए घटनाक्रम से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 27 मार्च 2026 को शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर और उनके परिजनों ने रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे। इसी दिन वित्त विभाग ने गोयल फैशंस को रिसॉर्ट के लिए विशेष पैकेज देने का आदेश जारी किया था। खबर में 40 विला-कॉटेज खरीद का भी उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सभी खरीदारों और संपत्तियों की पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसलिए खरीद से जुड़े प्रत्येक तथ्य की जांच महत्वपूर्ण है।

विशेष पैकेज में मिली थीं बड़ी रियायतें

गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम-2019 के तहत विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कंपनी को 10 साल तक स्टेट टैक्स पर 75 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान था। इसके अलावा विद्युत शुल्क में 100 प्रतिशत छूट सहित अन्य रियायतें भी शामिल थीं। बताया गया है कि पैकेज को 14 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट की बैठक में मंजूरी मिली थी। उस समय शिखर अग्रवाल उद्योग एवं निवेश विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे और बैठक में शामिल हुए थे।

एसीबी जांच में पद के दुरुपयोग की आशंका

इस पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच शुरू की है। जांच में पद के संभावित दुरुपयोग की आशंका के पहलू को भी देखा जा रहा है। हालांकि, जांच शुरू होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित निर्णयों की प्रक्रिया, पैकेज की मंजूरी और संपत्ति खरीद के घटनाक्रम की पड़ताल अहम होगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही जिम्मेदारी और संभावित अनियमितताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर से मांगा स्पष्टीकरण

कार्मिक विभाग ने आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने प्रकाशित खबरों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही संपत्ति से जुड़े मामलों पर भी जानकारी देने को कहा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नोटिस के जवाब के लिए सात दिन की सामान्य समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया है। जवाब देने की अवधि को टाइम बाउंड नहीं बताया गया। अब संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण और जांच की प्रगति पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

जांच के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर

अजबगढ़ रिसॉर्ट से जुड़ा यह प्रकरण निवेश प्रोत्साहन, प्रशासनिक निर्णय और संपत्ति खरीद के घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े करता है। सरकार की ओर से रियायतों पर रोक और एसीबी की जांच इस मामले को अहम बना रही है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष से पहले जांच के सभी पहलुओं और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आना जरूरी है। फिलहाल कंपनी को स्वीकृत रियायतों का लाभ जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगा।

प्रशासन का पक्ष

जांच जारी

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