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अलवर मंडी में प्याज के भाव 1700 रुपए प्रति मण तक पहुंचे, किसानों को राहत; पिछेती फसल पर रोग का खतरा

अलवर में प्याज की शुरुआती फसल किसानों को इस बार बेहतर भाव दे रही है। मंडी में प्याज के दाम 1300 से 1700 रुपए प्रति मण तक पहुंच गए हैं। पिछले साल कम कीमतों के कारण किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में मौजूदा भाव से किसानों को राहत मिली है। हालांकि, पिछेती फसल में रोग और सफेदी की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों और व्यापारियों को डर है कि बारिश के असर से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

1300 से 1700 रुपए प्रति मण मिल रहे भाव
फोटो: STV NEWS

मुख्य बातें

  • अलवर में प्याज के भाव 1700 रुपए मण तक पहुंचे, किसानों को राहत
  • प्याज की कीमतों में उछाल, अलवर मंडी में बढ़ने लगी आवक
  • प्याज के अच्छे भाव से खिले किसानों के चेहरे, उत्पादन पर चिंता बरकरार

ALWAR,03 NOV. 2026:

मंडी में रोजाना पहुंच रहे 20 हजार कट्टे प्याज

अलवर मंडी में फिलहाल प्रतिदिन करीब 20 हजार कट्टे प्याज की आवक हो रही है। प्याज व्यापारी सौरभ कालरा के अनुसार, पिछले दिनों बारिश के कारण मंडी में आवक धीमी पड़ गई थी। अब मौसम में बदलाव के साथ प्याज की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है। व्यापारी का अनुमान है कि दीपावली के बाद मंडी में प्रतिदिन आवक 50 हजार कट्टों से अधिक हो सकती है। आवक बढ़ने के साथ बाजार में प्याज के भाव किस स्तर पर टिकते हैं, इस पर किसानों और व्यापारियों की नजर रहेगी।

1300 से 1700 रुपए प्रति मण मिल रहे भाव

इस समय मंडी में प्याज के भाव 1300 से 1700 रुपए प्रति मण तक बताए जा रहे हैं। पिछले साल कम कीमतों के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। कई किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था। इस बार शुरुआती फसल को मिल रहे बेहतर दाम से किसानों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, अच्छे भाव का वास्तविक फायदा उत्पादन और खेती पर हुए खर्च के बाद ही सामने आएगा। किसानों को उम्मीद है कि आगे भी बाजार में कीमतें बेहतर बनी रहेंगी।

बारिश से पिछेती फसल की ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका

प्याज व्यापारी सौरभ कालरा के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश से पिछेती फसल की ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका है। कुछ क्षेत्रों में फसल में रोग और सफेदी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। व्यापारी ने करीब 20 से 25 प्रतिशत प्याज खराब होने की आशंका जताई है। हालांकि, नुकसान का वास्तविक आंकड़ा फसल की स्थिति और आगे के मौसम पर निर्भर करेगा। यदि रोग का असर बढ़ता है तो किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता, दोनों स्तर पर नुकसान हो सकता है।

एक बीघा में करीब 70 हजार रुपए की लागत

पृथ्वीपुरा निवासी किसान बहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 4 से 5 बीघा जमीन में प्याज की बुवाई की है। उनके अनुसार, एक बीघा में लगभग 70 हजार रुपए की लागत आई है। बीज खरीदने, मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों के कारण खेती की लागत बढ़ गई है। किसान का कहना है कि इस बार प्याज के भाव अच्छे मिल रहे हैं, लेकिन इन कीमतों से मजदूरी और दूसरे खर्च निकालना भी जरूरी है। इसलिए बेहतर भाव मिलने के बावजूद किसानों को मुनाफे का आकलन सोच-समझकर करना पड़ रहा है।

अच्छे भाव के बीच उत्पादन को लेकर किसानों की चिंता

अलवर में प्याज की शुरुआती फसल से किसानों को उम्मीद बंधी है। लेकिन पिछेती फसल में रोग और सफेदी की आशंका के कारण चिंता बनी हुई है। यदि मौसम अनुकूल रहा और फसल सुरक्षित रही तो किसानों को बेहतर उत्पादन का लाभ मिल सकता है। वहीं, रोग फैलने या प्याज की गुणवत्ता प्रभावित होने पर अच्छे बाजार भाव का फायदा सीमित रह सकता है। फिलहाल किसान मंडी के भाव और खेतों में फसल की स्थिति, दोनों पर नजर बनाए हुए हैं।

प्रशासन का पक्ष

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