STVNEWS RAJASTHANअलवर से पूरे राजस्थान तकमंगलवार, 3 नवंबर 2026LIVE TVEnglishEN

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने ही पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन, ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन ने विभाग के भीतर अनुशासन और कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दो अधिकारियों के तबादले के विरोध में करीब 100 पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर जुटे और बाद में परिसर के अंदर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। इस बीच, सोशल मीडिया पर नेहा बोरा की टिप्पणी भी चर्चा में है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिसकर्मी यदि पुलिस के ही खिलाफ प्रदर्शन करें और वह क्षेत्र प्रतिबंधित हो, तो क्या उन्हें हिरासत में लिया जाएगा?

ACP मनस्वी वशिष्ठ ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व

मुख्य बातें

  • दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिसकर्मियों का धरना, ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड
  • दो अधिकारियों के तबादले पर बवाल, दिल्ली पुलिस मुख्यालय में धरने पर बैठे जवान
  • अपने ही विभाग के खिलाफ पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन, नेहा बोरा ने उठाया सवाल

NEW DELHI, 03 NOV. 2026:

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे करीब 100 पुलिसकर्मी

2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इनमें बड़ी संख्या में उत्तर-पूर्वी जिले के पुलिसकर्मी शामिल थे। प्रदर्शनकारी ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार के तबादले रद्द करने की मांग कर रहे थे। उनके हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां थीं। पुलिस मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

ACP मनस्वी वशिष्ठ ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व

प्रदर्शन का नेतृत्व ACP मनस्वी वशिष्ठ ने किया। उन्होंने कहा कि उनकी मांग पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात करने की है। वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि पुलिसकर्मी खुद को थाने के अंदर सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने ऐसे मामलों से निपटने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग भी रखी।

वकील और पुलिस के बीच विवाद के बाद हुआ था तबादला

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि शाहदरा थाने में 23 अक्टूबर को हुआ पुलिस और वकीलों के बीच टकराव है। इस मामले में एक वकील ललित बंसल के सिर में चोट लगने की बात सामने आई थी। वकीलों ने आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार और धमकी दी। उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी पर रिवॉल्वर लहराने का आरोप भी लगाया था। इसके बाद वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था।

मुख्यालय के अंदर भी धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अनुशासन बनाए रखने और वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करने की अपील की। इसके बावजूद दोपहर करीब 1:30 बजे प्रदर्शनकारी मुख्यालय परिसर के अंदर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। वे पुलिस एकता के समर्थन में नारे लगा रहे थे। बाद में पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। शाम करीब 5:30 बजे संपर्क सभा के माध्यम से संवाद शुरू हुआ।

प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित

दिल्ली पुलिस ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई मुख्यालय के बाहर और परिसर के अंदर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद की गई। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में निलंबन के विस्तृत आधार और विभागीय कार्रवाई की आगे की प्रक्रिया का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। यह घटनाक्रम पुलिस विभाग में अनुशासन, अधिकारियों के तबादले और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

नेहा बोरा की टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा में

प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने इसे साझा करते हुए नेहा बोरा को टैग किया और पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। इसके जवाब में नेहा बोरा ने सवाल उठाया कि यदि पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस के समर्थन में, दिल्ली पुलिस के ही खिलाफ ऐसे क्षेत्र में प्रदर्शन करें जहां धारा 163 लागू हो, तो क्या उन्हें हिरासत में लिया जाएगा? उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई। इस प्रतिक्रिया को प्रदर्शन के दौरान लागू नियमों और पुलिसकर्मियों के अधिकारों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

क्या पुलिसकर्मी सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं?

पुलिसकर्मियों के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन का अधिकार आम नागरिकों जैसा नहीं होता। पुलिस बल में अनुशासन बनाए रखने के लिए उनके कुछ अधिकारों पर विशेष कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। पुलिस फोर्स (रिस्ट्रिक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 1966 इस संबंध में प्रमुख कानून है। इसके तहत पुलिसकर्मियों की संगठनात्मक गतिविधियों और कुछ अधिकारों पर सीमाएं निर्धारित की गई हैं। हालांकि, कानून में कुछ सीमित अपवाद भी हैं। सेवा संबंधी समस्याओं को उठाने के लिए निर्धारित शिकायत निवारण और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पुलिस विभाग के भीतर उठे अनुशासन और शिकायत के सवाल

इस घटनाक्रम ने पुलिसकर्मियों की शिकायतों के समाधान और विभागीय अनुशासन के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपने अधिकारियों के तबादले और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे। वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विभागीय अनुशासन बनाए रखना भी जिम्मेदारी है। अब निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई और शाहदरा विवाद की जांच पर निगाहें रहेंगी।

इस खबर को शेयर करें

इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं

Google पर STV की खबरें ज़्यादा देखें

STV को अपना पसंदीदा स्रोत चुनें।