STVNEWS RAJASTHANअलवर से पूरे राजस्थान तकमंगलवार, 3 नवंबर 2026LIVE TVEnglishEN

राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट, EWS-LIG मकानों के लिए दूरी की सीमा तय

राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य सरकार ने योजना का नया ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें बिल्डरों के लिए ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान बनाने की दूरी निर्धारित करने के साथ अतिरिक्त निर्माण अधिकार और शुल्कों में छूट का प्रावधान किया गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, शहरों की आबादी के आधार पर मुख्य प्रोजेक्ट से 2 से 5 किलोमीटर के दायरे में ही ये आवास बनाने होंगे। हालांकि, ये बदलाव फिलहाल ड्राफ्ट में प्रस्तावित हैं।

मुख्यमंत्री जन आवास योजना
फोटो: STV NEWS

मुख्य बातें

  • राजस्थान में सस्ते मकानों के नियम बदलने की तैयारी, नया ड्राफ्ट जारी
  • EWS-LIG आवासों के लिए 2 से 5 किलोमीटर की दूरी का प्रस्ताव
  • बिल्डरों को अतिरिक्त बीएआर और शुल्क में छूट, जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट

JAIPUR, 03 NOV. 2026:

आबादी के आधार पर तय होगी आवास बनाने की दूरी

नए ड्राफ्ट में बिल्डरों को मुख्य आवासीय प्रोजेक्ट से दूर मनमर्जी की जगह पर ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मकान बनाने की छूट सीमित करने का प्रस्ताव है। अब तक कई मामलों में बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट में सस्ते मकान बनाने के बजाय दूसरी जगह जमीन लेकर आवास तैयार कर देते थे। इससे इन मकानों में रहने वाले परिवारों को सड़क, पानी और परिवहन जैसी सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी होती थी।प्रस्तावित नियमों के अनुसार, दूरी शहर की आबादी के आधार पर तय होगी। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अधिकतम 5 किलोमीटर, एक लाख से अधिक और 10 लाख तक आबादी वाले शहरों में 3 किलोमीटर तथा एक लाख तक आबादी वाले शहरों में अधिकतम 2 किलोमीटर की सीमा प्रस्तावित है।

10 हजार वर्गमीटर से बड़े प्रोजेक्ट में होगी अनिवार्यता

योजना के पुराने प्रावधानों में 5 हजार वर्गमीटर से बड़े भूखंड पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों के लिए ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास तैयार करना अनिवार्य था। नए ड्राफ्ट में इस सीमा को बढ़ाकर 10 हजार वर्गमीटर करने का प्रस्ताव है।यदि यह प्रावधान अंतिम नियमों में शामिल होता है, तो 10 हजार वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों को इस अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। वहीं, निर्धारित सीमा से बड़े प्रोजेक्ट में सस्ते आवास बनाने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

नक्शा मंजूरी के समय ही देना होगा दूसरी जगह आवास का प्रस्ताव

नए ड्राफ्ट में यह भी प्रस्ताव है कि यदि बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट के बजाय दूसरी जगह ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास बनाना चाहता है, तो उसे भवन मानचित्र की स्वीकृति के समय ही इसका प्रस्ताव देना होगा।इसके साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र देने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सस्ते आवासों की व्यवस्था बाद में टालने के बजाय प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही स्पष्ट हो जाए। इससे आवास निर्माण और मुख्य परियोजना के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

बिल्डरों को अतिरिक्त बीएआर और शुल्कों में छूट का प्रस्ताव

सरकार ने निजी बिल्डरों को योजना में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अतिरिक्त निर्माण अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास बनाने पर 1.0 अतिरिक्त बीएआर देने की बात कही गई है।इसके अलावा अलग आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने पर इमारत की ऊंचाई के अनुसार 0.75 से 2.0 तक अतिरिक्त बीएआर का प्रावधान प्रस्तावित है। भू-रूपांतरण सहित विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट देने की बात भी ड्राफ्ट में शामिल है। इन प्रावधानों का उद्देश्य बिल्डरों की लागत कम करना और किफायती आवासों के निर्माण को बढ़ावा देना है।

निजी जमीन पर 60 प्रतिशत क्षेत्र EWS-LIG के लिए आरक्षित

निजी जमीन पर फ्लैट आधारित आवासीय प्रोजेक्ट में कुल निर्मित क्षेत्र का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासों के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में अन्य श्रेणियों के मकान बनाए जा सकेंगे।इसमें भी कम से कम आधा निर्मित क्षेत्र एमआईजी-ए श्रेणी के लिए रखने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर के माध्यम से आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी होगी। प्रस्ताव के अनुसार, इसमें 75 प्रतिशत तक भूमि ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासों के लिए और शेष 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों के लिए रखी जा सकेगी।

EWS श्रेणी के लिए कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट का प्रावधान

नए ड्राफ्ट में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवासों के अनुपात को लेकर भी शर्त रखी गई है। इसके अनुसार, इन आवासों में कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट ईडब्ल्यूएस श्रेणी की होनी चाहिए।सरकार ने पुराने योजना क्रियान्वयन के दौरान सामने आई समस्याओं को भी नए प्रस्ताव में ध्यान में रखा है। इनमें निर्माण कार्य में देरी, परियोजनाओं का अटकना और लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध नहीं होना जैसी चुनौतियां शामिल हैं। नए नियमों का उद्देश्य आवास निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और पात्र परिवारों तक किफायती मकान पहुंचाना बताया गया है।

नए ड्राफ्ट के बाद आगे क्या?

मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब इसके प्रावधानों पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। ड्राफ्ट के प्रस्तावों और अंतिम रूप से लागू होने वाले नियमों में बदलाव संभव है। इसलिए बिल्डरों और आवास की उम्मीद कर रहे परिवारों को अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना होगा।यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं, तो बड़े आवासीय प्रोजेक्ट में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मकानों की योजना, उनकी लोकेशन और निर्माण व्यवस्था में बदलाव आएगा। साथ ही, अतिरिक्त बीएआर और शुल्कों में छूट से निजी बिल्डरों की भागीदारी पर भी असर पड़ सकता है।

प्रशासन का पक्ष

..

इस खबर को शेयर करें

इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं

Google पर STV की खबरें ज़्यादा देखें

STV को अपना पसंदीदा स्रोत चुनें।