अलवर में दिवाली पर दो दिन चला सकेंगे ग्रीन पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति
दिवाली पर पटाखे चलाने की तैयारी कर रहे अलवर और एनसीआर क्षेत्र के लोगों के लिए राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय में केवल ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी है। सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे। हालांकि अस्पतालों, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। दूसरी ओर, बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच अलवर और भिवाड़ी में ग्रेप-2 के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय भी सख्त किए जा रहे हैं।

मुख्य बातें
- दिवाली पर अलवर में 7 और 8 नवंबर को ही चलेंगे ग्रीन पटाखे
- अस्पताल और स्कूलों के 300 मीटर दायरे में पटाखों पर पाबंदी
- सुप्रीम कोर्ट की अनुमति, सुबह-शाम तय समय में चला सकेंगे पटाखे
ALWAR 03 NOV. 2026:
7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय में ही चला सकेंगे पटाखे
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के दौरान पटाखे चलाने को लेकर सीमित अनुमति दी है। इसके तहत 7 और 8 नवंबर को केवल ग्रीन पटाखे चलाए जा सकेंगे। सुबह 6 से 7 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति रहेगी। यानी सुबह एक घंटे और रात में दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है।इस व्यवस्था का उद्देश्य त्योहार की परंपरा और वायु प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाना है। निर्धारित समय के अलावा पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। लोगों को आदेशों का पालन करने और केवल अनुमत श्रेणी के पटाखों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
अस्पताल और स्कूलों के 300 मीटर दायरे में प्रतिबंध
पटाखे चलाने को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध लागू रहेंगे। अस्पताल, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्र और वृद्धाश्रम के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर रोक रहेगी। अधिसूचित साइलेंस जोन में भी यह प्रतिबंध लागू होगा।इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों को नो-क्रैकर जोन घोषित करने और उनकी स्पष्ट मार्किंग करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित संस्थानों को लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचानी होगी। इसका उद्देश्य मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों को ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी समय निर्धारित करने पर दिया था जोर
पटाखों को लेकर पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि त्योहार के दौरान पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय संतुलित व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। 30 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि पटाखे चलाने की अनुमति चौबीसों घंटे नहीं दी जा सकती। इसके लिए एक निश्चित समय तय करना जरूरी है।वहीं, 29 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट ने लोगों को जागरूक करने के लिए चर्चित हस्तियों की मदद लेने का सुझाव भी दिया था। कोर्ट ने विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों के वीडियो और संदेशों के माध्यम से प्रदूषण रहित दिवाली मनाने की अपील करने की बात कही थी।
अलवर और भिवाड़ी में ग्रेप-2 लागू, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रेप-2 लागू किया गया है। इसके तहत अलवर और भिवाड़ी में भी प्रदूषण नियंत्रण के उपाय सख्त किए जाएंगे। नगर निकायों को प्रमुख सड़कों पर मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाना होगा।निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के इंतजामों की जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार स्मॉग गन का इस्तेमाल भी कराया जाएगा। अधिक यातायात और जाम वाले इलाकों में सुबह व्यस्त समय से पहले पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं।
अलवर का एक्यूआई 212, भिवाड़ी में 189 दर्ज
प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए अलवर और भिवाड़ी में निगरानी बढ़ाई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सोमवार को अलवर का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 212 दर्ज किया गया। वहीं, भिवाड़ी का एक्यूआई 189 रहा।ग्रेप-2 के तहत आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। होटल और रेस्टोरेंट में कोयले तथा लकड़ी से चलने वाले तंदूर के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा लोगों से निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने की अपील की गई है।
वाहनों की जांच और पीयूसी प्रमाणपत्र पर भी जोर
प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों के रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाएगा। वाहन मालिकों से इंजन दुरुस्त रखने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी अपडेट रखने की अपील की गई है। प्रमुख सड़कों पर मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग कराई जाएगी।धूल नियंत्रण के लिए पानी के साथ विशेष पदार्थों का छिड़काव भी किया जा सकता है। इन उपायों का मकसद दिवाली के दौरान प्रदूषण में संभावित बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। ऐसे में लोगों की जिम्मेदारी भी अहम होगी कि वे निर्धारित समय और नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाएं।
प्रशासन का पक्ष
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