अलवर-भिवाड़ी में प्रदूषण का कहर: AQI 330 के पार, स्मॉग से ढका आसमान
सर्दी की शुरुआत के साथ अलवर और भिवाड़ी में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो गई है। रविवार को अलवर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 330 और भिवाड़ी का 307 दर्ज किया गया। दोनों शहरों की हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह के समय धुंध और स्मॉग की मोटी परत दिखाई दी। अलवर में प्रदूषण के कारण ऐतिहासिक बाला किला भी साफ नजर नहीं आया। मौसम में ठंडक बढ़ने और हवा की धीमी गति के बीच लोगों को प्रदूषण से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।

मुख्य बातें
- अलवर में AQI 330 और भिवाड़ी में 307, स्मॉग से ढके शहर
- अलवर-भिवाड़ी की हवा में घुला जहर, सांस के मरीजों की बढ़ी चिंता
- बाला किला भी धुंध में गायब, अलवर में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब
ALWAR,03 NOV. 2026:
अलवर और भिवाड़ी की हवा हुई बहुत खराब
नवंबर की शुरुआत के साथ ही अलवर और भिवाड़ी में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। रविवार को अलवर का AQI 330 रिकॉर्ड किया गया, जबकि भिवाड़ी में यह 307 तक पहुंच गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से ऊपर होने पर हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में मानी जाती है।इस स्तर पर प्रदूषण का असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक बाहर रहने वाले लोगों और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। औद्योगिक गतिविधियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं और धूल जैसे कारकों के बीच दोनों शहरों में प्रदूषण की स्थिति पर निगरानी जरूरी हो गई है।
स्मॉग की चादर से ढका शहर, बाला किला भी नहीं आया नजर
अलवर में रविवार सुबह प्रदूषण का असर साफ दिखाई दिया। शहर के ऊपर धूल और धुएं के कणों से बनी धुंध की परत छाई रही। दृश्यता कम होने के कारण ऐतिहासिक बाला किला भी स्पष्ट नजर नहीं आया।हालांकि, दोपहर में धूप निकलने के बाद दृश्यता में कुछ सुधार हुआ। इसके साथ ही AQI में भी मामूली गिरावट दर्ज होने की जानकारी सामने आई। लेकिन शाम होते ही ठंडी हवाओं और प्रदूषण के कणों के वातावरण में बने रहने से स्थिति फिर बिगड़ गई। सुबह और शाम के समय स्मॉग का असर अधिक महसूस किया गया।
बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को ज्यादा खतरा
प्रदूषण का बढ़ता स्तर बच्चों, बुजुर्गों और दमा सहित सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिंता का विषय है। खराब हवा के संपर्क में रहने से खांसी, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।ऐसे में लोगों को प्रदूषण अधिक रहने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला और सही फिटिंग का मास्क इस्तेमाल करना बेहतर है। आंखों में जलन होने पर साफ पानी से धो सकते हैं। सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
दिन में धूप, सुबह-शाम बढ़ रही ठंड
नवंबर की शुरुआत के साथ अलवर में मौसम का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। सुबह और रात में ठंडक बढ़ रही है, जबकि दोपहर में तेज धूप के कारण लोगों को राहत मिल रही है।रविवार को अधिकतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन और रात के तापमान में अंतर के कारण मौसम में बदलाव महसूस किया जा रहा है। सुबह के समय धुंध और प्रदूषण का असर भी अधिक दिखाई दे रहा है।
धीमी हवा से प्रदूषण बने रहने की आशंका
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं। तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। वहीं, हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में बने रह सकते हैं।ऐसी स्थिति में अलवर और भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की निगरानी जैसे उपाय महत्वपूर्ण होंगे। लोगों को भी निजी वाहनों का सीमित उपयोग करने और खुले में कचरा जलाने से बचने की जरूरत है।
प्रशासन का पक्ष
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