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भारत में स्मार्टफोन बिक्री को बड़ा झटका, 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

भारत के स्मार्टफोन बाजार में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बड़ी सुस्ती देखने को मिली है। बढ़ती मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की कीमतों के कारण स्मार्टफोन महंगे हो गए, जिससे ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई। नतीजतन, स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले छह वर्षों में जून तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

महंगी मेमोरी बनी गिरावट की सबसे बड़ी वजह

मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन बाजार में आई गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मेमोरी चिप्स की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। बढ़ती लागत का असर सीधे स्मार्टफोन की कीमतों पर पड़ा, जिससे लगभग सभी प्रमुख कंपनियों को अपने डिवाइस महंगे करने पड़े। कीमतें बढ़ने के कारण उपभोक्ताओं ने नए फोन खरीदने की बजाय पुराने फोन का इस्तेमाल अधिक समय तक जारी रखा, जिससे बाजार की मांग कमजोर पड़ गई।

औसत स्मार्टफोन कीमत में 15% तक इजाफा

रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी के अलावा अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लागत भी लगातार बढ़ी है। इसके चलते दूसरी तिमाही के अंत तक स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत (ASP) में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनियों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऑफर, डिस्काउंट और आसान फाइनेंसिंग योजनाएं भी पेश कीं, लेकिन महंगाई के दबाव के सामने इनका असर सीमित रहा।

सबसे ज्यादा असर सस्ते स्मार्टफोन सेगमेंट पर

15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इस श्रेणी की शिपमेंट में साल-दर-साल करीब 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। महंगाई और आर्थिक दबाव के कारण उपभोक्ताओं ने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की, जिसका सीधा असर बजट स्मार्टफोन की बिक्री पर पड़ा। बदलते हालात को देखते हुए कई कंपनियों ने इस वर्ग में अपने 4G स्मार्टफोन पोर्टफोलियो का विस्तार भी शुरू कर दिया है।

प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी रही मजबूत

जहां बजट सेगमेंट कमजोर रहा, वहीं 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की बिक्री पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ा। इसकी मुख्य वजह आसान ईएमआई और फाइनेंसिंग विकल्प रहे, जिनकी मदद से महंगे स्मार्टफोन भी ग्राहकों की पहुंच में बने रहे। इससे प्रीमियम कैटेगरी ने बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

आने वाले महीनों में भी चुनौती बरकरार रहने के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन उद्योग पर फिलहाल दबाव बना रहेगा। सितंबर 2025 के बाद से मेमोरी की कीमतें करीब चार गुना बढ़ चुकी हैं और आने वाले समय में इनके पांच गुना तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि कंपोनेंट्स की लागत ऊंची बनी रहती है तो पूरे वर्ष भारत के स्मार्टफोन बाजार में करीब 13 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हो सकती है।

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