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‘भारत तेल से कमा रहा अरबों डॉलर, हम अब भी पीछे’, पाकिस्तानी विश्लेषक ने अपनी सरकार को घेरा

ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के बीच पाकिस्तान के वरिष्ठ विश्लेषक आमिर मतीन ने अपनी सरकार की ऊर्जा नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत ने समय रहते अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर संकट को अवसर में बदला, जबकि पाकिस्तान ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर पर्याप्त तैयारी नहीं कर सका।

ऊर्जा सुरक्षा पर पाकिस्तान सरकार पर उठाए सवाल

एक टीवी कार्यक्रम में आमिर मतीन ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट कोई नई बात नहीं है, लेकिन असली सवाल यह है कि देशों ने इसके लिए कितनी तैयारी की। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने पिछले कई वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संकट के समय सरकार की तैयारी बेहद कमजोर दिखाई दी, जिसका असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ा।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता की तारीफ

आमिर मतीन ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि देश ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता में लगातार निवेश किया है। उनके मुताबिक, गुजरात समेत कई क्षेत्रों में स्थापित आधुनिक रिफाइनरियां न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे की वजह से भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहतर स्थिति में है।

रूसी तेल से भारत को आर्थिक लाभ मिलने का दावा

पाकिस्तानी विश्लेषक ने दावा किया कि भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन करता है और फिर विभिन्न देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। उनके अनुसार, इससे भारतीय रिफाइनिंग उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग संस्थानों के अनुमान भिन्न हैं और आधिकारिक तौर पर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पाकिस्तान की रिफाइनिंग क्षमता पर जताई चिंता

आमिर मतीन ने कहा कि पाकिस्तान में वर्षों से ऊर्जा क्षेत्र के विकास के नाम पर संसाधन जुटाए गए, लेकिन रिफाइनिंग क्षमता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना था कि देश अभी भी अपनी जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकट के समय चुनौतियां और बढ़ जाती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसलिए भारत समेत कई देश ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर भी लगातार काम कर रहे हैं।

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