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‘3 इडियट्स’ का रैंचो आखिर किससे प्रेरित था? सोनम वांगचुक नहीं, सामने आई पूरी सच्चाई

सोनम वांगचुक की हालिया भूख हड़ताल के बीच एक बार फिर फिल्म ‘3 इडियट्स’ चर्चा में आ गई है। लंबे समय से माना जाता रहा कि आमिर खान का मशहूर किरदार रैंचो (फुंसुख वांगडू) सोनम वांगचुक पर आधारित था। लेकिन अब आमिर खान और फिल्म से जुड़े निर्माताओं के बयानों ने इस धारणा पर नया सवाल खड़ा कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस किरदार की असली प्रेरणा कौन था।

आमिर खान ने साफ किया- सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था किरदार

हाल ही में आमिर खान ने स्पष्ट किया कि ‘3 इडियट्स’ का फुंसुख वांगडू या रैंचो का किरदार सीधे तौर पर सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था। हालांकि फिल्म रिलीज होने के बाद से दोनों के बीच समानताओं की चर्चा होती रही। खुद सोनम वांगचुक भी कई बार कह चुके हैं कि किरदार में उनके जीवन की कुछ झलक जरूर दिखाई देती है, लेकिन यह पूरी तरह उन पर आधारित नहीं है। आमिर के बयान के बाद वर्षों से चली आ रही इस बहस को नया मोड़ मिल गया है।

फिल्म की कहानी चेतन भगत के उपन्यास से आई

आधिकारिक तौर पर ‘3 इडियट्स’ की कहानी चेतन भगत के चर्चित उपन्यास ‘फाइव पॉइंट समवन’ से प्रेरित मानी जाती है। हालांकि फिल्म रिलीज के समय उपन्यासकार और निर्माताओं के बीच क्रेडिट को लेकर विवाद भी हुआ था। इसके बावजूद फिल्म की पटकथा में कई ऐसे वास्तविक अनुभव और घटनाएं शामिल की गईं, जिन्होंने रैंचो के किरदार को अलग पहचान दी।

राजकुमार हिरानी ने बताया असली प्रेरणा का किस्सा

निर्देशक राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि रैंचो का मूल विचार उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के एक छात्र की वास्तविक घटना से मिला था। उनके अनुसार, एक युवक एफटीआईआई में दाखिला नहीं पा सका, लेकिन उसने अपने दोस्त की पहचान अपनाकर तीन साल तक फिल्म निर्माण की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी उसने डिग्री की बजाय ज्ञान को ज्यादा महत्व दिया। यही सोच रैंचो के उस संदेश की नींव बनी कि शिक्षा का असली उद्देश्य सीखना है, सिर्फ प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं।

विधु विनोद चोपड़ा ने भी किया बड़ा दावा

फिल्म के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने भी बाद में कहा कि रैंचो के व्यक्तित्व में उनके अपने जीवन के कई अनुभव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में वह नियमित रूप से कक्षाओं में नहीं जाते थे और पढ़ाई के दौरान कई मुश्किलों का सामना किया। परिवार चाहता था कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन उन्होंने फिल्म निर्माण को अपना करियर चुना। उनके संघर्ष और अलग सोच ने भी इस किरदार को आकार देने में भूमिका निभाई।

‘फुंसुख वांगडू’ नाम कैसे पड़ा?

साल 2021 में हिमालयन फिल्म फेस्टिवल के दौरान विधु विनोद चोपड़ा ने एक और दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ‘फुंसुख वांगडू’ नाम उनके एफटीआईआई के एक लद्दाखी सहपाठी फुंटसोक से प्रेरित था, जिन्हें वह प्यार से इसी नाम से बुलाते थे। यानी फिल्म में इस्तेमाल किया गया नाम वास्तविक व्यक्ति से प्रेरित था, लेकिन पूरी कहानी किसी एक व्यक्ति के जीवन पर आधारित नहीं थी।

रैंचो क्यों बना यादगार किरदार?

फिल्म में आमिर खान ने रणछोड़दास श्यामलदास चांचड़ (रैंचो) का किरदार निभाया, जो शिक्षा को अंकों और रटने की बजाय जिज्ञासा, समझ और जुनून से जोड़कर देखता है। फिल्म का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह था कि रैंचो की असली पहचान फुंसुख वांगडू नाम के एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक और इनोवेटर की होती है। यही विचार और शिक्षा को लेकर उसका नजरिया आज भी इस किरदार को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रेरणादायक पात्रों में शामिल करता है।

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