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दीया मिर्जा के दिवाली के वीडियो हटाने पर सियासत, मुंबई मेयर के बयान से बढ़ी बहस

मुंबई में प्रदूषण मुक्त दिवाली अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अभियान से अभिनेत्री दीया मिर्जा का वीडियो हटाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने इस फैसले का समर्थन करते हुए अभिनेत्री पर हिंदुत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने के आरोप लगाए। वहीं, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी वीडियो को लेकर अपनी आपत्ति जताई। विवाद के बीच पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक परंपराओं और त्योहारों पर राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा चर्चा में है।

दीया मिर्जा , मुंबई की मेयर रितु तावड़े
फोटो: STV NEWS

मुख्य बातें

  • दीया मिर्जा के वीडियो पर बवाल, मुंबई मेयर ने लगाए गंभीर आरोप
  • BMC ने हटाया दीया मिर्जा का वीडियो, मेयर के बयान से बढ़ी बहस
  • दिवाली, प्रदूषण और राजनीति: दीया मिर्जा विवाद में नया मोड़

MUMBAI,03 NOV. 2026:

दीया मिर्जा का वीडियो हटाने पर शुरू हुआ विवाद

मुंबई में दीपावली के दौरान प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान का एक वीडियो विवाद का केंद्र बन गया है। इस वीडियो में अभिनेत्री दीया मिर्जा लोगों से शोर और वायु प्रदूषण से बचने की अपील कर रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को वीडियो को अभियान से हटा दिया गया। इसके बाद मुंबई भाजपा प्रमुख अमित सातम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आपत्ति जताई और बीएमसी के आधिकारिक अकाउंट को टैग किया। उन्होंने कहा कि दिवाली मनाने का तरीका सीखने के लिए दीया मिर्जा की जरूरत नहीं है। इसके बाद मामला राजनीतिक बहस में बदल गया।

मेयर रितु तावड़े ने फैसले का समर्थन किया

मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने बीएमसी के फैसले का समर्थन किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हिंदुओं को दिवाली मनाने का तरीका बताने के लिए दीया मिर्जा की जरूरत नहीं है। तावड़े ने अभिनेत्री पर हिंदुत्व का विरोध करने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक, अभिनेत्री का रुख एक चुनिंदा एजेंडे को दर्शाता है। मेयर ने यह भी कहा कि बीएमसी के अभियानों में किसी व्यक्ति को शामिल करने से पहले मेयर कार्यालय की मंजूरी होनी चाहिए। हालांकि, ये मेयर के राजनीतिक आरोप और उनका पक्ष हैं। इन्हें अभिनेत्री के खिलाफ प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

नर्मदा परियोजना, UCC और पीएम मोदी को लेकर भी लगाए आरोप

मेयर रितु तावड़े ने दीया मिर्जा के पुराने सार्वजनिक बयानों का जिक्र करते हुए नर्मदा परियोजना, समान नागरिक संहिता (UCC) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर सवाल उठाए। तावड़े ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री का विरोध लगातार हिंदुत्व और इससे जुड़े प्रयासों के खिलाफ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मिर्जा को बीएमसी के भविष्य के कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, इस विवाद में अभिनेत्री की पर्यावरण संबंधी अपील और उस पर हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

दीया मिर्जा ने क्या कहा? पर्यावरण और जनहित का दिया हवाला

वीडियो हटाए जाने के बाद दीया मिर्जा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अभिनेत्री ने कहा कि उनका वीडियो बीएमसी और बॉम्बे हाईकोर्ट की अपील के तहत जनहित में रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने वायु प्रदूषण को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए प्रदूषण कम करने के प्रयासों का समर्थन किया। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि उन्होंने अभियान के लिए कोई शुल्क नहीं लिया था। इस घटनाक्रम ने सवाल खड़ा किया कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश को राजनीतिक नजरिए से देखा जाना चाहिए या इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

रामदास अठावले और नितेश राणे ने भी जताई आपत्ति

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दिवाली में पटाखों के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि त्योहार की खुशियों को बनाए रखना चाहिए, लेकिन प्रदूषण से भी बचना जरूरी है। वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू त्योहारों को निशाना बनाया जाता है, जबकि दूसरे धार्मिक आयोजनों के दौरान पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर समान प्रतिक्रिया नहीं दिखाई देती। राणे ने मुहर्रम, ईद और रमजान का उल्लेख करते हुए अपनी आपत्ति जाहिर की। उनके बयान भी अब इस विवाद की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।

अन्य सेलिब्रिटी के वीडियो मौजूद, कार्रवाई पर उठे सवाल

बीएमसी के अभियान में दीया मिर्जा के अलावा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे सहित अन्य हस्तियों के संदेश भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मिर्जा का वीडियो हटाए जाने के बाद भी कुछ अन्य हस्तियों के वीडियो बीएमसी के सोशल मीडिया पेजों पर मौजूद रहे। इसी अंतर को लेकर राजनीतिक सवाल उठे। विपक्षी नेताओं ने भी वीडियो हटाने के फैसले पर आपत्ति जताई और बीएमसी से स्पष्टीकरण मांगा। शिवसेना (UBT) और कांग्रेस नेताओं ने समान व्यवहार और संवैधानिक मूल्यों का मुद्दा उठाया।

प्रदूषण मुक्त दिवाली और धार्मिक परंपराओं के बीच बहस

इस पूरे विवाद में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। पहला, दीपावली की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर लोगों की भावनाएं। दूसरा, त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने की जरूरत। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने को लेकर प्रतिबंधों और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का भी संदर्भ सामने आया है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के संदेश और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हुई है। विवाद के बीच यह भी जरूरी है कि राजनीतिक आरोपों और पर्यावरण संबंधी तथ्यों को अलग-अलग समझा जाए।

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