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अनंत सिंह की विधायकी खतरे में: बिहार विधानसभा का नोटिस, एक हफ्ते में दें जवाब; जदयू ने मांगी सदस्यता रद्द..

बिहार के चर्चित बाहुबली नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक यात्रा में एक बार फिर गंभीर मोड़ आ गया है। बिहार विधानसभा ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर उन्हें औपचारिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में अनंत सिंह से एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यह कार्रवाई जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की उस शिकायत के आधार पर उठाई गई है, जिसमें पार्टी ने अनंत सिंह के अनुशासनहीन व्यवहार और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।

विधायकी पर लटकी तलवार: विधानसभा का सख्त नोटिस
फोटो: STV NEWS RAJASTHAN

मुख्य बातें

  • अनंत सिंह की विधायकी पर संकट: बिहार विधानसभा का नोटिस, एक हफ्ते में दें जवाब
  • नीरज कुमार विवाद: अनंत सिंह को विधायकी बचाने के लिए मिली एक सप्ताह की मोहलत
  • बिहार politics: अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ीं, विधानसभा ने मांगा स्पष्टीकरण

02-11-2026 बिहार:

विधायकी पर लटकी तलवार: विधानसभा का सख्त नोटिस

बिहार के चर्चित बाहुबली नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक यात्रा में एक बार फिर गंभीर मोड़ आ गया है। बिहार विधानसभा ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर उन्हें औपचारिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में अनंत सिंह से एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यह कार्रवाई जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की उस शिकायत के आधार पर उठाई गई है, जिसमें पार्टी ने अनंत सिंह के अनुशासनहीन व्यवहार और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। विधानसभा के इस कदम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि अनंत सिंह की विधायकी बचाना अब एक कानूनी और संवैधानिक चुनौती बन गया है।

बगावत की जड़: नीरज कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा

अनंत सिंह के खिलाफ जदयू नेतृत्व की नाराजगी की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव के दौरान उनका विद्रोही रुख रहा। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू ने अपने मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय 'जन सुराज' के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के पक्ष में खुले तौर पर प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने मीडिया और सभाओं में नीरज कुमार को हराने की बात कही, जिसे पार्टी ने सीधा धोखा और अनुशासन का उल्लंघन माना। इस कदम ने पार्टी हाईकमान को झकझोर कर रख दिया और अनंत सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की राह प्रशस्त हुई।

पुरानी रंजिश: चुनावी दुश्मनी का परिणाम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि यह अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रही पुरानी राजनीतिक खींचतान का परिणाम है। अनंत सिंह का आरोप है कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया था और उनके प्रभाव को कम करने की कोशिश की थी। इसी व्यक्तिगत और राजनीतिक नाराजगी के चलते अनंत सिंह ने पटना स्नातक सीट के चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह जैसे दिग्गजों ने मामले को सुलझाने और अनंत सिंह को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने रुख पर अडिग रहे और अंततः पार्टी लाइन के विपरीत जाकर कार्य किया।

जदयू का सख्त कदम: 6 साल के लिए निष्कासन

चुनाव परिणाम आने के बाद जदयू ने अनुशासनहीनता के मामले में बहुत सख्त रुख अपनाया। यद्यपि नीरज कुमार ने राजद के उम्मीदवार दिलीप कुमार को 4,655 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की और अनंत सिंह के समर्थित प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन पार्टी ने अनंत सिंह के व्यवहार को क्षम्य नहीं माना। जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी तथा विधायक नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही, पार्टी ने बिहार विधानसभा के अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की और अपने दावे के समर्थन में आवश्यक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए।

अनंत सिंह का बचाव: 'कोई पार्टी विरोधी काम नहीं'

विधानसभा के नोटिस के बाद अनंत सिंह मीडिया के सामने सक्रिय हो गए हैं और लगातार अपना पक्ष रख रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने बिहार एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ कोई अवैध या अनुशासन विरोधी काम नहीं किया है। उनका तर्क है कि उन्होंने केवल नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया था, जो एक व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेद था, न कि पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ बगावत। अनंत सिंह इसे अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता और स्थानीय मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वे विधानसभा को दिए जाने वाले अपने जवाब में किस तरह के कानूनी और तार्किक बचाव पेश करते हैं, जो उनकी विधायकी को बचा सके।

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