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AAP के विघटन का संकेत? पायलट ने कहा- जब अपने नेता छोड़ रहे, 4 नवंबर को राहुल की 'इंसाफ रैली'

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन प्रमुख विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौरमाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी पुष्टि करते हुए तीनों नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय है कि सभी मिलकर पंजाब के हर घर तक विकास और शांति पहुंचाएं।

पायलट का हमला: सिद्धांतों से भटकी AAP, जनता का विश्वास टूटा
फोटो: STV NEWS RAJASTHAN

मुख्य बातें

  • AAP के विधायकों के BJP में जाने पर पायलट गरजे: जब अपने लोग छोड़ें, तो जनता क्यों करे भरोसा?
  • पंजाब में सियासी भूचाल: AAP छोड़ BJP में शामिल हुए 3 विधायक, पायलट ने लगाया बड़ा हमला
  • 4 नवंबर को संगरूर में राहुल गांधी की 'इंसाफ रैली', पायलट ने बताई खासियत

02-11-2026 पंजाब:

राजनीतिक भूचाल: AAP से BJP में शामिल हुए तीन विधायक

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन प्रमुख विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौरमाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी पुष्टि करते हुए तीनों नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय है कि सभी मिलकर पंजाब के हर घर तक विकास और शांति पहुंचाएं। यह घटनाक्रम AAP के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये विधायक पार्टी के स्थापना काल से जुड़े हुए थे और उनकी मौजूदगी पार्टी की ताकत का प्रतीक मानी जाती थी। इस कदम से राज्य में सियासी समीकरणों में बदलाव की आशंका जताई जा रही है।

पायलट का हमला: सिद्धांतों से भटकी AAP, जनता का विश्वास टूटा

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता और पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने AAP पर जबरदस्त निशाना साधा है। पायलट ने कहा कि AAP उन सिद्धांतों और वादों के आधार पर बनी थी, जिन पर वह पंजाब में सत्ता में आई थी, लेकिन अब वह पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने तर्क दिया कि जब पार्टी के अपने ही विधायकों और सांसदों को नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा और वे पार्टी छोड़ रहे हैं, तो पंजाब की आम जनता उस पर कैसे विश्वास कर सकती है? पायलट ने इसे AAP के बुनियादी सिद्धांतों से भटकने का परिणाम बताया और कहा कि पार्टी अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है, जिसका खामियाजा अब उसे भुगतना पड़ रहा है।

विधानसभा और राज्यसभा में बढ़ता असंतोष

सचिन पायलट ने अपनी बात को और मजबूत करते हुए AAP में चल रहे आंतरिक असंतोष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि केवल विधायक ही नहीं, बल्कि पार्टी के कई राज्यसभा सांसद भी पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं और कई अन्य प्रमुख नेता लगातार इस्तीफा दे रहे हैं। यह क्रम दर्शाता है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व के प्रति गहरा अविश्वास पनप चुका है। पायलट ने सवाल उठाया कि यदि पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधि ही अपने नेताओं और दिशा-निर्देशों से संतुष्ट नहीं हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि संगठन कमजोर हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक पार्टी के लिए चिंताजनक है और पंजाब की जनता अब इससे सबक ले रही है।

4 नवंबर को संगरूर में राहुल गांधी की 'इंसाफ रैली'

राजनीतिक हमलों के बीच सचिन पायलट ने एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 4 नवंबर को पंजाब के संगरूर जिले में एक विशाल 'इंसाफ रैली' को संबोधित करेंगे। पायलट ने कहा कि यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के हक और न्याय की आवाज उठाने का एक ऐतिहासिक अवसर होगा। इस रैली में प्रदेश भर से पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा आम नागरिक, किसान और युवा बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। पायलट ने दावा किया कि यह रैली पंजाब के पुनरुद्धार और सकारात्मक बदलाव की एक नई शुरुआत साबित होगी, जहां जनता अपने मुद्दों को सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रख सकेगी।

मुद्दे: नशा, हिंसा और बेरोजगारी पर उठेगी आवाज

राहुल गांधी की आगामी रैली के एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए सचिन पायलट ने कहा कि इस दौरान राज्य में बढ़ते नशे के अभिशाप, हिंसा और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता से व्यापक संवाद किया जाएगा। पंजाब में नशे की समस्या एक सामाजिक महामारी बन चुकी है, जिसने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है, लेकिन वर्तमान सरकार इस पर नियंत्रण पाने में विफल रही है। पायलट ने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने अपने चुनावी वादों के बावजूद इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं की। 'इंसाफ रैली' के माध्यम से कांग्रेस इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी और पंजाब की जनता को आश्वासन देगी कि उनके हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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