अजमेर: पुष्कर मेले से पहले रेतीले धोरों में सड़क निर्माण पर विवाद, प्रशासन पर दोहरे मापदंड के आरोप
पुष्कर में 10 नवंबर से शुरू होने वाले पशु मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच नए मेला मैदान में करीब दो किलोमीटर लंबी पथरीली सड़क बनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि बागेश्वर धाम की कथा के लिए रेतीले धोरों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ने की आशंका जताकर सशर्त अनुमति दी गई थी। वहीं, अब मेला मैदान में खुद सरकारी स्तर पर पत्थर और कंकरीट डालकर सड़क बनाई जा रही है। इससे धोरों के संरक्षण और ऊंटों की आवाजाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्य बातें
- बागेश्वर कथा पर शर्तें, अब मेला मैदान में सड़क निर्माण से विवाद
- पुष्कर की प्राकृतिक पहचान पर सवाल, मेला मैदान में सड़क बना रहा एडीए
- पुष्कर मेले से पहले धोरों में पक्की सड़क, प्रशासन के फैसले पर सवाल
AJMER,03 NOV. 2026:
10 नवंबर से शुरू होगा पुष्कर पशु मेला
पुष्कर में पशु मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 10 नवंबर से मेले के लिए पशुओं और पशुपालकों का पहुंचना शुरू हो गया है। ऊंटपालकों ने सावित्री पहाड़ी की तलहटी में तंबू लगाने शुरू कर दिए हैं। मेला मैदान में मनोरंजन के साधन भी स्थापित किए जा रहे हैं। पशु मेला 10 नवंबर से 26 नवंबर तक चलेगा। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कार्तिक शुक्ल अष्टमी यानी 17 नवंबर को ध्वजारोहण के साथ मेले की औपचारिक शुरुआत होगी। पशुपालन विभाग 12 नवंबर से पशुओं के प्रवेश मार्गों पर चौकियां स्थापित करेगा।
रेतीले धोरों में पत्थर-कंकरीट डालकर बनाई जा रही सड़क
नए मेला मैदान में पत्थर, कंकरीट और बरडा डालकर सड़क निर्माण कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह सड़क करीब दो किलोमीटर लंबी है। इसके निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पुष्कर के रेतीले धोरों की प्राकृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। वहीं, अश्वपालकों के लिए बनाए जा रहे रास्ते से ऊंटों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऊंटों के पैरों की बनावट रेतीली जमीन पर चलने के अनुकूल होती है। ऐसे में पथरीले रास्ते से गुजरना उनके लिए असुविधाजनक हो सकता है।
बागेश्वर धाम कथा को लेकर सशर्त अनुमति का मामला
नए मेला मैदान में बागेश्वर धाम की कथा के आयोजन को लेकर पहले भी धोरों के संरक्षण का मुद्दा सामने आया था। खबर के अनुसार, जिला प्रशासन ने मौके का निरीक्षण करने के बाद प्राकृतिक स्वरूप बनाए रखने की शर्त पर आयोजन की अनुमति दी थी। अब उसी क्षेत्र में सड़क निर्माण होने से प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी आयोजन से धोरों के स्वरूप को नुकसान पहुंचने की आशंका थी, तो स्थायी निर्माण के प्रभाव का भी आकलन होना चाहिए। हालांकि, सड़क निर्माण की अनुमति और उसकी शर्तों का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
पर्यटन विभाग की जमीन पर एडीए करा रहा निर्माण
मेला मजिस्ट्रेट गुरुप्रसाद तंवर के अनुसार, नया मेला मैदान पर्यटन विभाग को आवंटित जमीन पर है। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) की ओर से कराया जा रहा है। वहीं, पर्यटन विभाग के उपनिदेशक योगेश खत्री ने भी सड़क निर्माण एडीए की ओर से कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे मेला मैदान की यथास्थिति बनाए रखने का प्रयास करेंगे, लेकिन सरकार के उच्च स्तर पर लिए गए निर्णयों का पालन करना पड़ता है।
ऊंटपालकों की सुविधा और प्राकृतिक स्वरूप पर सवाल
मेले में बड़ी संख्या में ऊंटपालक अपने पशुओं के साथ पहुंचते हैं। उन्हें निर्धारित स्थानों तक पहुंचने के लिए मेला मैदान के रास्तों का इस्तेमाल करना होगा। ऐसे में पथरीली सड़क से ऊंटों की आवाजाही को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसके अलावा, रेतीले धोरों का प्राकृतिक स्वरूप पुष्कर की पहचान और पर्यटन से भी जुड़ा है। अब सवाल यह है कि सड़क निर्माण से पशुओं की सुविधा और पर्यावरणीय संतुलन पर क्या असर पड़ेगा। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
प्रशासन का पक्ष
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