उदयपुर में स्विमिंग पूलों पर रोजाना खर्च हो रहा 1 करोड़ लीटर पानी, एक लाख लोगों की जरूरत के बराबर
झीलों की नगरी उदयपुर में कम बारिश के बीच जल संकट की चिंता बढ़ रही है। शहर में लोगों को 72 घंटे के अंतराल पर पानी की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, होटल और रिसॉर्ट्स के स्विमिंग पूलों में प्रतिदिन करीब एक करोड़ लीटर पानी खर्च होने का अनुमान है। यह मात्रा पुराने शहर के 18 वार्डों की करीब एक लाख आबादी की जरूरत के बराबर बताई जा रही है। निजी बोरवेल से भूजल दोहन और पूलों में पानी की खपत को लेकर निगरानी तथा नियमन की मांग उठ रही है।

मुख्य बातें
- उदयपुर में जल संकट के बीच स्विमिंग पूलों में रोज खर्च हो रहा करोड़ों लीटर पानी
- उदयपुर के 2000 होटल स्विमिंग पूल पर उठे सवाल, भूजल दोहन की चिंता
- झीलों की नगरी में पानी का संकट, होटल पूलों की खपत पर बहस
उदयपुर के करीब 2000 होटलों में बने हैं स्विमिंग पूल
उदयपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 3000 होटल और रिसॉर्ट संचालित होने का अनुमान है। इनमें से लगभग 2000 होटलों में स्विमिंग पूल बने हुए हैं। इन पूलों की क्षमता 50 हजार से लेकर 5 लाख लीटर तक बताई गई है। यदि प्रत्येक पूल की औसत क्षमता 1.50 लाख लीटर मानी जाए तो सभी 2000 पूलों को एक बार भरने में करीब 30 करोड़ लीटर पानी लगेगा। कई होटलों में छतों पर भी स्विमिंग पूल बनाए गए हैं। इन्हें भरने में पानी के साथ बिजली की भी खपत होती है।
रोजाना एक करोड़ लीटर पानी खर्च होने का अनुमान
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर होटल के स्विमिंग पूलों में पानी की खपत का अनुमान लगाया गया है। बताया गया है कि पूलों की सफाई और स्वच्छता के लिए महीने में एक बार पानी बदला जाता है। यदि सभी 2000 पूलों की औसत क्षमता 1.50 लाख लीटर मानी जाए तो एक बार पानी बदलने पर कुल 30 करोड़ लीटर पानी की जरूरत होगी। इसे 30 दिनों में बांटने पर प्रतिदिन औसतन एक करोड़ लीटर पानी की खपत का आंकड़ा सामने आता है। हालांकि, वास्तविक खपत पूलों की संख्या, क्षमता और पानी बदलने की अवधि पर निर्भर करेगी।
निजी बोरवेल से भूजल निकालने पर चिंता
होटल और रिसॉर्ट संचालक स्विमिंग पूलों को भरने के लिए निजी बोरवेल और ट्यूबवेल का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए सबमर्सिबल पंपों से भूजल निकाला जाता है। जल संकट के बीच इस तरह के दोहन पर निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है। चिंता जताई जा रही है कि यदि भूजल का इस्तेमाल इसी तरह जारी रहा तो जलस्तर पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उदयपुर के भूजल स्तर और होटल उद्योग की वास्तविक खपत का आकलन आधिकारिक आंकड़ों से होना जरूरी है।
जल संकट में स्विमिंग पूलों के इस्तेमाल पर नियमन की मांग
पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए स्विमिंग पूलों के संचालन और उनमें पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम बनाने की मांग उठ रही है। सुझाव दिया जा रहा है कि पूलों में पानी के रिसाइक्लिंग प्लांट अनिवार्य किए जाएं। इसके अलावा, भूजल से सीधे पूल भरने पर नियंत्रण और जल संकट के दौरान अस्थायी प्रतिबंध जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। पर्यटन उदयपुर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों और आम लोगों की पेयजल जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी सामने है।
पीएचईडी अधिकारी बोले- प्रशासन ले सकता है सख्त निर्णय
पीएचईडी के एसई रवींद्र चौधरी के अनुसार, विभाग का काम उपलब्ध पानी की आपूर्ति करना है। उन्होंने कहा कि होटलों की निगरानी पर्यटन विभाग के दायरे में आती है। चौधरी के मुताबिक, जल संकट को देखते हुए यदि प्रशासन सख्त निर्णय लेता है तो भूजल के अत्यधिक दोहन में कमी लाई जा सकती है। ऐसे में होटल संचालकों, पर्यटन विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय से पानी की खपत पर नियंत्रण के उपाय किए जा सकते हैं।
प्रशासन का पक्ष
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