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संसद का विशेष सत्र शुरू: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर सियासी टकराव तेज

भारतीय संसद का विशेष सत्र 2026 के पहले ही दिन राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लागू करने और परिसीमन के जरिए चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी में है, जबकि विपक्ष इन प्रस्तावों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। खास तौर पर परिसीमन के प्रावधानों को लेकर दोनों पक्षों में तीखी टकराहट के संकेत मिल रहे हैं।

तीन बड़े विधेयकों से बदलेगा चुनावी ढांचा

सरकार इस विशेष सत्र में तीन अहम विधेयक पेश कर रही है—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक। इनका मकसद नई जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करना, लोकसभा की सीटें बढ़ाना और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है। प्रस्तावों के लागू होने पर देश की प्रतिनिधित्व प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे राजनीतिक संतुलन भी प्रभावित होने की संभावना है।

महिला आरक्षण लागू करने की नई कोशिश

महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण देने का कानून पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन यह अब तक लागू नहीं हुआ है। सरकार अब इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कदम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, हालांकि इसके क्रियान्वयन की शर्तें ही विवाद का कारण बन गई हैं।

विपक्ष का समर्थन भी, विरोध भी

कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी दल महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन को लेकर उन्होंने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश जैसे नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि आरक्षण लागू होना चाहिए, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना ‘संदिग्ध’ और ‘राजनीतिक’ है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए चुनावी लाभ लेना चाहती है।

विपक्षी एकजुटता और रणनीति

विशेष सत्र से पहले विपक्षी दलों की बैठक में एक साझा रणनीति तैयार की गई। इसमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला और अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी दलों ने तय किया कि वे संसद में परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का एकजुट होकर विरोध करेंगे। यह संकेत है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी बहस और संभावित गतिरोध देखने को मिल सकता है।

परिसीमन पर सबसे बड़ा विवाद

परिसीमन विधेयक को लेकर सबसे ज्यादा विवाद खड़ा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि इससे राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है, खासकर दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों पर असर पड़ेगा। वहीं सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है, जो भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा।

प्रधानमंत्री का रुख और आगे की दिशा

नरेंद्र मोदी इस सत्र में महिला आरक्षण पर अपनी बात रखेंगे और सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट करेंगे। सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार और महिला सशक्तिकरण का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहा है। अब नजर इस बात पर है कि संसद में बहस किस दिशा में जाती है और क्या इन विधेयकों पर सहमति बन पाती है या टकराव और बढ़ेगा।

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