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अलवर की मिट्टी में महका चंदन, किसान ने खेती से पेश की नई मिसाल

Alwar News: अलवर में चंदन की खेती से किसान को बड़ा लाभ

राजस्थान के अलवर जिले में एक किसान ने परंपरागत सोच से हटकर चंदन की खेती कर नई पहचान बनाई है। खोहरा मलावली गांव के किसान रामकिशोर मीणा ने कम पानी और सीमित संसाधनों के बीच चंदन के पौधे तैयार कर यह साबित किया कि सही तकनीक और धैर्य के साथ राजस्थान की जमीन पर भी चंदन की सफल खेती की जा सकती है। अब उनकी यह पहल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

रिटायरमेंट के बाद चुना खेती में नवाचार का रास्ता

अलवर आकाशवाणी केंद्र से सेवानिवृत्त होने के बाद रामकिशोर मीणा ने खेती में कुछ अलग करने का फैसला किया। चंदन की खेती से जुड़ी जानकारी उन्होंने विभिन्न कृषि कार्यक्रमों और डिजिटल माध्यमों से जुटाई। इसके बाद उन्होंने अपने गांव खोहरा मलावली स्थित खेत में चंदन लगाने की योजना बनाई। शुरुआत में उन्हें स्थानीय जलवायु और मिट्टी को लेकर संदेह था, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने इस प्रयोग को आगे बढ़ाया।

मिट्टी की जांच के बाद लगाए 300 पौधे

खेती शुरू करने से पहले रामकिशोर मीणा ने अपनी जमीन की मिट्टी की उपयुक्तता का परीक्षण कराया। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद उन्होंने कर्नाटक से चंदन के करीब 300 पौधे और उनके साथ लगाए जाने वाले होस्ट पौधे मंगवाए। पौधों की खरीद और रोपण पर लगभग 90 हजार रुपये का खर्च आया। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए चंदन के पौधों के साथ आवश्यक सहयोगी पौधे भी लगाए, जिससे उनके विकास में मदद मिल सके।

कम पानी में सफल खेती बनी प्रेरणा

अलवर के इस क्षेत्र में पानी की कमी लंबे समय से खेती के लिए चुनौती रही है। ऐसे में रामकिशोर ने कम पानी में बेहतर परिणाम देने वाली चंदन की खेती को चुना। उनका कहना है कि उचित देखभाल और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण पौधों का विकास संतोषजनक रहा है। इस प्रयोग ने यह संकेत दिया है कि यदि वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए तो कम पानी वाले क्षेत्रों में भी वैकल्पिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती संभव है।

भविष्य में बेहतर आय की उम्मीद

रामकिशोर मीणा का मानना है कि चंदन की खेती लंबी अवधि का निवेश है, जिससे भविष्य में अच्छी आय प्राप्त हो सकती है। उन्हें इस पहल में परिवार और कृषि विशेषज्ञों का भी सहयोग मिला। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी चंदन जैसी वैकल्पिक खेती में रुचि दिखा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई फसल को अपनाने से पहले मिट्टी, जलवायु और तकनीकी सलाह का परीक्षण करना जरूरी है, ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

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