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दलित छात्र सुसाइड केस: सुप्रीम कोर्ट की प्रोफेसर को फटकार, बोला- ‘ऐसे व्यवहार पर कड़ा संदेश जाना चाहिए’

केरल के कन्नूर डेंटल कॉलेज के दलित छात्र नितिन राज की आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी प्रोफेसर को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने प्रोफेसर के कथित व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षकों को अपने आचरण के परिणाम समझने चाहिए और ऐसे मामलों में समाज तक स्पष्ट संदेश जाना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने आरोपी प्रोफेसर डॉ. एम. कोडंडा राम की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया प्रोफेसर के कथित व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षक का अपने छात्रों के प्रति व्यवहार संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए।

दलित छात्र की आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ मामला

मामला केरल के कन्नूर डेंटल कॉलेज का है, जहां छात्र नितिन राज ने अप्रैल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे कॉलेज में जातिगत आधार पर प्रताड़ित किया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉ. कोडंडा राम और दो अन्य कर्मचारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

बचाव पक्ष ने रखी यह दलील

सुप्रीम कोर्ट में आरोपी प्रोफेसर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कथित उत्पीड़न और छात्र की आत्महत्या के बीच लगभग एक महीने का अंतर था। उनका कहना था कि आत्महत्या से ठीक पहले छात्र एक अन्य विवाद और वित्तीय दबाव का भी सामना कर रहा था, इसलिए पूरे घटनाक्रम को केवल एक घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अनुशासन बनाए रखने वाले शिक्षकों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

‘शिक्षक के व्यवहार का छात्रों पर गहरा असर पड़ता है’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी छात्र का कक्षा में सार्वजनिक रूप से अपमान किया जाता है, तो उसका मानसिक प्रभाव गंभीर हो सकता है। अदालत ने कहा कि शिक्षकों को यह समझना होगा कि उनके शब्द और व्यवहार छात्रों के जीवन पर गहरा असर डाल सकते हैं। पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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