लाल किला विस्फोट मामला: कोर्ट ने NIA को जैविक अवशेषों के निपटारे की दी अनुमति, जांच में कई अहम पहलुओं का दावा
दिल्ली के लाल किला कार विस्फोट मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को घटनास्थल से बरामद मृतकों और मृत आरोपी के जैविक अवशेषों के सम्मानजनक निपटारे की अनुमति दे दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया मानवीय गरिमा और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए पूरी की जाए। साथ ही एनआईए को कार्रवाई पूरी होने के बाद अदालत में विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद मांगी गई थी अनुमति
सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत को बताया कि बरामद जैविक अवशेषों पर आवश्यक फोरेंसिक और वैज्ञानिक परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। एजेंसी के अनुसार अब इन अवशेषों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है। इसी आधार पर एनआईए ने उनके सम्मानजनक निपटारे की अनुमति मांगी थी। अदालत ने एजेंसी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता और निर्धारित कानूनी मानकों के अनुरूप पूरी की जानी चाहिए।
2025 के विस्फोट मामले की जांच अब भी जारी
यह मामला नवंबर 2025 में लाल किला क्षेत्र के पास हुए कार विस्फोट से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार इस घटना में कई लोगों की जान गई थी और अनेक अन्य घायल हुए थे, जबकि आसपास की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद एनआईए ने विस्तृत जांच शुरू की और तकनीकी व फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। मामले की सुनवाई फिलहाल अदालत में जारी है।
चार्जशीट में आतंकी साजिश का आरोप
एनआईए द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि इस मामले के पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े लोगों की साजिश थी, जिसे एजेंसी ने अल-कायदा से संबद्ध संगठन बताया है। चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने कथित रूप से विस्फोटक तैयार करने, युवाओं को जोड़ने और हमले की योजना बनाने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा।
डीएनए और अन्य वैज्ञानिक तकनीकों से जुटाए गए साक्ष्य
जांच एजेंसी के अनुसार मामले की जांच में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, वॉयस विश्लेषण और अन्य आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग किया गया। एनआईए का कहना है कि इन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कई आरोपियों की पहचान और कथित भूमिका की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। एजेंसी ने इस मामले में 10 से अधिक आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता तथा आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। मामले की आगे की सुनवाई संबंधित अदालत में जारी रहेगी।