STVNEWS RAJASTHANअलवर से पूरे राजस्थान तकमंगलवार, 3 नवंबर 2026LIVE TVEnglishEN

महबूबा मुफ्ती का फारूक अब्दुल्ला पर निशाना, बोलीं- कश्मीरियों को लेकर दिल्ली को दे रहे संदेश

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। PDP प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कश्मीर के मुद्दे पर बार-बार रुख बदलने का आरोप लगाया है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान से जुड़े बयान पर भी निशाना साधा। महबूबा ने दावा किया कि फारूक अब्दुल्ला का यह बयान दिल्ली के लिए एक संदेश है कि कश्मीरी पाकिस्तान के साथ हैं। उन्होंने केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच अविश्वास दूर करने के लिए बातचीत को जरूरी बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
फोटो: STV NEWS

मुख्य बातें

  • फारूक अब्दुल्ला के बयान पर महबूबा का पलटवार, दिल्ली को संदेश देने का लगाया आरोप
  • कश्मीर की राजनीति में जुबानी जंग तेज, महबूबा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरा
  • भाजपा गठबंधन पर महबूबा की कार्यकर्ताओं को नसीहत, नेकां पर भी साधा निशाना

Jammu Kashmir, 03 NOV. 2026:

नेशनल कॉन्फ्रेंस पर अविश्वास का माहौल बनाने का आरोप

महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच अविश्वास के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख समय-समय पर बदलता रहा है। महबूबा के मुताबिक, इसी वजह से लोगों के मन में संदेह और भ्रम की स्थिति बनी। उन्होंने पार्टी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के भारत के साथ विलय के फैसले का भी उल्लेख किया।

शेख अब्दुल्ला और जनमत संग्रह के मुद्दे पर सवाल

महबूबा ने आरोप लगाया कि भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय के कुछ वर्षों बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनमत संग्रह की मांग शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने लंबे समय तक इस मांग को उठाया, लेकिन बाद में 1975 में इंदिरा-शेख समझौते के तहत सत्ता में वापसी स्वीकार कर ली। महबूबा ने सवाल उठाया कि यदि पार्टी जनमत संग्रह की मांग पर कायम थी, तो उसने मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के बाद इस मुद्दे को पीछे क्यों छोड़ दिया।

सत्ता के लिए राजनीतिक रुख बदलने का दावा

PDP अध्यक्ष ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला पर सत्ता के लिए अपना राजनीतिक रुख बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री पद की मांग और जनमत संग्रह जैसे मुद्दे उठाए गए, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री पद स्वीकार कर लिया गया। महबूबा ने यह भी कहा कि जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और संवैधानिक व्यवस्था दी थी। उनके अनुसार, राजनीतिक घटनाक्रमों ने केंद्र और कश्मीर के लोगों के बीच अविश्वास को बढ़ाया।

फारूक अब्दुल्ला के बयान को दिल्ली के लिए संदेश बताया

महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान से जुड़े बयान कश्मीरियों को उकसाने वाले हैं। महबूबा ने दावा किया कि इस तरह के बयान के जरिए दिल्ली को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कश्मीरी पाकिस्तान के साथ हैं। यह महबूबा की राजनीतिक टिप्पणी है। फारूक अब्दुल्ला के बयान का पूरा संदर्भ और उनकी प्रतिक्रिया अलग से देखना महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर कार्यकर्ताओं को दी सलाह

महबूबा ने अपने कार्यकर्ताओं से 2014 में सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ किए गए गठबंधन को लेकर शर्मिंदा नहीं होने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता इस गठबंधन पर सवाल उठाएं, तो कार्यकर्ता उन्हें पार्टी के पुराने राजनीतिक फैसलों और बदलते रुख की याद दिलाएं। महबूबा ने इस मुद्दे को नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति से जोड़ते हुए अपनी पार्टी के फैसले का बचाव किया।

कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की वकालत

अपने संबोधन में महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से कश्मीर मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती के उपायों से अविश्वास दूर नहीं होगा। उनके मुताबिक, केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच बेहतर संबंध बनाने के लिए संवाद जरूरी है। इस बयान के साथ महबूबा ने एक बार फिर कश्मीर की राजनीतिक स्थिति, केंद्र के साथ संबंधों और क्षेत्रीय दलों की भूमिका को लेकर अपनी पार्टी का रुख सामने रखा।

प्रशासन का पक्ष

....

इस खबर को शेयर करें

इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं

Google पर STV की खबरें ज़्यादा देखें

STV को अपना पसंदीदा स्रोत चुनें।