ओमान तट पर अमेरिकी हमले में भारतीय इंजीनियर की मौत, आंध्र की राजनीति में मचा बवाल
ओमान तट के पास अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विशाखापट्टनम के मरीन इंजीनियर पतनाला सुरेश की मौत ने जहां परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, वहीं इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और TDP नेता नारा लोकेश की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सरकार पर संवेदनशील मुद्दों से दूरी बनाने का आरोप लगाया है।
ओमान तट पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत
जानकारी के अनुसार, ओमान तट के पास पालाउ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान यह घटना हुई। यह क्षेत्र होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जो वैश्विक तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप था, जिसके बाद कार्रवाई की गई। इस घटना में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जिनमें चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया शामिल हैं।
विशाखापट्टनम के इंजीनियर की मौत से परिवार में शोक
मृतकों में शामिल पतनाला सुरेश विशाखापट्टनम के रहने वाले थे। उनकी मौत की पुष्टि के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सुरेश अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। शुरुआत में तीनों नाविकों को लापता बताया गया था, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई। इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने पवन कल्याण और नारा लोकेश पर उठाए सवाल
आंध्र प्रदेश कांग्रेस सांसद गद्दम वंसी कृष्णा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और TDP नेता नारा लोकेश की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पूछा कि जब भारतीय नागरिकों की विदेश में मौत हुई है, तो राज्य के प्रमुख नेताओं ने अब तक कोई संवेदना क्यों नहीं जताई। कांग्रेस का आरोप है कि ये नेता केवल राजनीतिक लाभ और पद बचाने के लिए केंद्र सरकार का समर्थन कर रहे हैं।
आंध्र सरकार की चुप्पी पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
घटना के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी चुप्पी को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की घटनाओं पर सरकार को तुरंत पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय घटना से राज्य की राजनीति तक पहुंचा मामला
यह मामला अब केवल अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं रह गया है, बल्कि आंध्र प्रदेश की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष इसे सरकार की संवेदनहीनता और चुप्पी से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्ता पक्ष पर अभी भी स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बना हुआ है। आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि पीड़ित परिवारों को न्याय और जवाबदेही की मांग लगातार तेज हो रही है।