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गोबर के 51 हजार दीपकों से जगमगाएगी दिवाली, 108 मंदिरों तक पहुंचेगा गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अलवर जिले के गोविंदगढ़ स्थित सेवल मंदिर में इस बार दीपावली पर अनूठी पहल की जा रही है। मंदिर परिसर में 51 हजार से अधिक गोबर के दीपक प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके लिए डेढ़ लाख से अधिक दीपक तैयार किए जा रहे हैं। मंदिर में आने वाले प्रत्येक परिवार को 21 दीपक निःशुल्क दिए जा रहे हैं। इस पहल के जरिए 108 मंदिरों तक गौसेवा, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने की तैयारी है। खास बात यह है कि दीपावली के बाद इन दीपकों को गमलों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

"दीये बनाती महिला"

मुख्य बातें

  • गोविंदगढ़ के सेवल मंदिर में 51 हजार से अधिक गोबर के दीपक जलाए जाएंगे।
  • आयोजन के लिए डेढ़ लाख से अधिक दीपक तैयार किए जा रहे हैं।
  • मंदिर आने वाले प्रत्येक परिवार को 21 दीपक निःशुल्क दिए जा रहे हैं।

ALWAR, 04 NOV. 2026:

सेवल मंदिर में गोबर के दीपकों से रोशन होगी दीपावली

अलवर जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में स्थित सेवल मंदिर ने दीपावली पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विशेष पहल की है। मंदिर की ओर से इस बार मिट्टी और मोम के बजाय गोबर से बने दीपक जलाने की तैयारी की जा रही है। दीपावली की गोधूलि बेला में एक साथ 51 हजार से अधिक दीपक प्रज्वलित किए जाएंगे।इस आयोजन के माध्यम से दीपावली की पारंपरिक रोशनी को गौसेवा और पर्यावरण जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिर परिसर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

डेढ़ लाख से अधिक दीपक किए जा रहे तैयार

आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी डेढ़ लाख से अधिक गोबर के दीपक तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें गोबर, लकड़ी के बुरादे और ग्वार गम के मिश्रण से बनाया जा रहा है।मंदिर की ओर से इन दीपकों को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने की योजना है। इसके तहत मंदिर में आने वाले प्रत्येक परिवार को 21 दीपक निःशुल्क भेंट किए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालु अपने घरों में भी गोबर के दीपक जलाकर इस पहल से जुड़ सकेंगे।

108 मंदिरों तक पहुंचाने की तैयारी

सेवल मंदिर की इस पहल का उद्देश्य केवल मंदिर परिसर में दीप जला

ना नहीं है। इसके जरिए गौसेवा, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने की योजना बनाई गई है।आयोजन से जुड़े जमना जीवन कृष्ण दास जी के अनुसार, इस पहल का संदेश 108 मंदिरों तक पहुंचाने की तैयारी है। उनका कहना है कि यह केवल दीपदान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि गौमाता के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का सामूहिक संकल्प है।

दीपावली के बाद जैविक खाद के रूप में आएंगे काम

गोबर से बने इन दीपकों की एक खास विशेषता इनके दोबारा उपयोग से जुड़ी है। दीपावली के बाद इन्हें कचरे में फेंकने की जरूरत नहीं होगी। इनका इस्तेमाल गमलों में जैविक खाद के रूप में किया जा सकेगा।इस तरह दीपक जलने के बाद भी उपयोगी बने रहेंगे। मंदिर की इस पहल में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी शामिल है। गोविंदगढ़ के सेवल मंदिर का यह प्रयास दीपावली की परंपरा को एक नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की कोशिश है।

प्रशासन का पक्ष

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