अलवर: किसी के बचपन पर जिम्मेदारियों का बोझ, आपकी खरीदारी से रोशन होगी गरीब परिवारों की दिवाली
दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन हर परिवार के लिए इसकी खुशियां एक जैसी नहीं होतीं। अलवर के कंपनी बाग रोड पर लगे दीपावली हाट बाजार में ऐसे कई जरूरतमंद परिवार दुकानें लगाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं। किसी बच्चे के नन्हे कंधों पर जिम्मेदारी है, तो कोई मां अपने दो महीने के बच्चे को गोद में लेकर दुकान संभाल रही है। करीब 300 दुकानदारों को नगर निगम ने निशुल्क कैनोपी उपलब्ध कराई है। अब इन परिवारों की उम्मीदें ग्राहकों की खरीदारी पर टिकी हैं। इस दिवाली आपकी एक छोटी-सी खरीदारी किसी के घर में बड़ी खुशी ला सकती है।

मुख्य बातें
- अलवर के कंपनी बाग रोड पर जरूरतमंद पटरी व्यापारियों के लिए दीपावली हाट बाजार लगाया गया है।
- नगर निगम ने करीब 300 दुकानदारों को निशुल्क कैनोपी उपलब्ध कराई है।
- बाजार में कई परिवार छोटे बच्चों को साथ लेकर दुकानें संभाल रहे हैं।
ALWAR, 04 NOV. 2026:
कंपनी बाग रोड पर सजा उम्मीदों का दीपावली बाजार

अलवर के कंपनी बाग रोड पर इस बार दीपावली का हाट बाजार जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीदों का नया ठिकाना बना है। सुबह होते ही यहां दुकानदार अपनी दुकानें सजाने में जुट जाते हैं। कोई मिट्टी के दीये सजा रहा है, तो कोई सजावटी सामान करीने से रख रहा है। हर दुकानदार की नजर ग्राहकों पर टिकी है।इन दुकानों पर सिर्फ दीपावली का सामान नहीं बिक रहा, बल्कि कई परिवारों की मेहनत और उम्मीदें भी जुड़ी हैं। दुकानदार चाहते हैं कि त्योहार के दिनों में अच्छी बिक्री हो। इससे वे अपने बच्चों के लिए कपड़े, मिठाइयां और घर की जरूरी चीजें खरीद सकें।
300 दुकानदारों को मिली निशुल्क कैनोपी

दरअसल, हर साल होप सर्कस और घंटाघर के आसपास दीपावली बाजार सजता था। इस बार बाजार को कंपनी बाग रोड पर स्थानांतरित किया गया है। अलवर सांसद भूपेंद्र यादव की मंशा के अनुरूप नगर निगम ने जरूरतमंद पटरी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित हाट बाजार तैयार किया है।यहां करीब 300 दुकानदारों को निशुल्क कैनोपी उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही पीने के पानी, रोशनी और साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई है। जिला प्रशासन, नगर निगम, नगर विकास न्यास और संयुक्त व्यापार महासंघ मिलकर व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। इससे छोटे व्यापारियों को एक व्यवस्थित स्थान पर कारोबार करने का अवसर मिला है।
पांच साल का बच्चा गोद में संभाल रहा दो महीने का भाई

इस बाजार की सबसे भावुक तस्वीर उन बच्चों की है, जो अपने माता-पिता के साथ दुकान पर समय बिता रहे हैं। किसी बच्चे की आंखों में नींद है, तो कोई दुकान के एक कोने में बैठा खेल रहा है। लेकिन कुछ बच्चों के सामने उम्र से पहले जिम्मेदारियां भी आ गई हैं।ऐसा ही एक दृश्य यहां देखने को मिला। करीब पांच साल का एक बच्चा अपनी गोद में दो महीने के छोटे भाई को संभाले बैठा था। उसकी उम्र अभी खेलने और खिलौनों से खुश होने की है। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उसे छोटे भाई की देखभाल करनी पड़ रही है। यह तस्वीर बचपन और जिम्मेदारियों के बीच के अंतर को बयां करती है।
गोद में दुधमुंहा बच्चा, सामने दुकान और रोजी-रोटी की चिंता
हाट बाजार में कई परिवार दूसरे शहरों और कस्बों से सामान बेचने पहुंचे हैं। उनके लिए यही दुकान कमाई का जरिया है। त्योहार के इन दिनों में अच्छी बिक्री उनके परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकती है।कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को भी साथ लेकर दुकान संभाल रहे हैं। एक मां अपने महज दो महीने के बच्चे को गोद में लेकर दुकान पर बैठी नजर आई। उसके सामने एक तरफ बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ परिवार की रोजी-रोटी का सवाल।ऐसे परिवारों के लिए बच्चों को घर पर छोड़ना भी आसान नहीं है। इसलिए वे अपनी मेहनत और जिम्मेदारियों के बीच बच्चों को साथ लेकर बाजार पहुंच रहे हैं।
इनकी दिवाली ग्राहकों की खरीदारी पर टिकी है
हाट बाजार में आए हर परिवार की अपनी जरूरत और कहानी है। किसी को घर का राशन खरीदना है, तो कोई बच्चों के लिए नए कपड़े और मिठाइयां ले जाना चाहता है। इनके लिए दिवाली की खुशी महंगे उपहारों में नहीं, बल्कि दुकान पर होने वाली बिक्री में छिपी है।दिनभर अच्छी बिक्री हो जाए तो घर का खर्च आसानी से निकल सकता है। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है। यही वजह है कि दुकानदार सुबह से शाम तक ग्राहकों का इंतजार करते हैं। उनके लिए हर ग्राहक और हर छोटी खरीदारी मायने रखती है।
इस दिवाली जरूरतमंद दुकानदारों से भी करें खरीदारी
दीपावली पर हम अपने घरों को सजाते हैं और अपनों के लिए उपहार खरीदते हैं। इस बार खरीदारी की सूची में कंपनी बाग रोड के इस हाट बाजार को भी शामिल किया जा सकता है। यहां से एक दीया, सजावटी सामान या मिट्टी की छोटी मूर्ति खरीदना किसी परिवार की कमाई में योगदान दे सकता है।जरूरतमंद दुकानदारों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य और ग्राहकों का साथ चाहिए। आपकी खरीदारी उनके लिए त्योहार की खुशियों का रास्ता बन सकती है।
असली दीपावली तब, जब हर घर में जले खुशियों का दीप
दीपावली का संदेश खुशियां बांटने और दूसरों के जीवन में रोशनी लाने का भी है। अलवर के इस हाट बाजार में बैठे परिवार इसी उम्मीद के साथ त्योहार का इंतजार कर रहे हैं। किसी बच्चे को बेफिक्र बचपन चाहिए, तो किसी माता-पिता को परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए अच्छी कमाई की उम्मीद है।इसलिए इस दीपावली एक छोटा-सा संकल्प लें। अपनी खरीदारी में इन जरूरतमंद दुकानदारों को भी जगह दें। हो सकता है, आपके घर के लिए खरीदा गया एक छोटा-सा दीया किसी दूसरे घर में बड़ी खुशी लेकर आए।
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