अलवर में ग्रीन पटाखों पर ही मिलेगी छूट, QR कोड जरूरी; 6 नवंबर तक पूरी तरह प्रतिबंध
दिवाली पर वायु प्रदूषण नियंत्रित रखने के लिए अलवर और एनसीआर क्षेत्र में पटाखों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी है। इनके पैकेट पर क्यूआर कोड होना अनिवार्य है। 6 नवंबर तक पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय में ही आतिशबाजी की जा सकेगी। वहीं, 9 नवंबर से फिर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा। बेरियम वाले पटाखों और लड़ियों पर भी रोक रहेगी।

मुख्य बातें
- अलवर और एनसीआर क्षेत्र में 6 नवंबर तक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध।
- 7 और 8 नवंबर को सीमित समय में ही आतिशबाजी की अनुमति।
- प्रत्येक ग्रीन पटाखे के पैकेट पर क्यूआर कोड होना जरूरी
ALWAR,05 NOV. 2026:
7 और 8 नवंबर को तय समय में ही चला सकेंगे पटाखे
दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए राज्य सरकार ने अलवर सहित एनसीआर क्षेत्र में पटाखों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत 6 नवंबर तक पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। वहीं, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तक आतिशबाजी की जा सकेगी। रात में 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति होगी। निर्धारित समय के अलावा आतिशबाजी करना प्रतिबंधित रहेगा। 9 नवंबर से फिर पटाखों पर पूरी तरह रोक लागू हो जाएगी।
केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एनसीआर के छह जिलों में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही बेचे और चलाए जा सकेंगे। इन पटाखों का प्रमाणन सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) से होना जरूरी है। सामान्य पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा बेरियम युक्त पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। पटाखों की बिक्री केवल निर्धारित दुकानों से की जा सकेगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखे बेचने पर भी रोक रहेगी।
QR कोड स्कैन करने पर मिलेगी प्रमाणन की जानकारी
ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड अनिवार्य किया गया है। ग्राहक इस कोड को स्कैन करके निर्माता, प्रमाणन और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे। बिना क्यूआर कोड वाले पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। इसलिए ग्राहकों को पटाखे खरीदते समय पैकेट पर क्यूआर कोड और प्रमाणन की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। इससे प्रतिबंधित और अप्रमाणित पटाखों की खरीद से बचा जा सकेगा।
अस्पताल और स्कूलों के आसपास 300 मीटर तक प्रतिबंध
सरकार ने संवेदनशील स्थानों के आसपास आतिशबाजी पर भी रोक लगाई है। अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्र, वृद्धाश्रम और शैक्षणिक संस्थानों के 300 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों को ध्वनि तथा वायु प्रदूषण से बचाना है।
दुकानों, गोदामों और वाहनों की होगी जांच
अवैध पटाखों की बिक्री और भंडारण रोकने के लिए प्रशासन को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलक्टर और पुलिस अधिकारियों को जांच के लिए विशेष टीमें गठित करने को कहा गया है। ये टीमें पटाखों की दुकानों और गोदामों की जांच करेंगी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आने वाले वाहनों की भी चेकिंग की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर पटाखे जब्त किए जा सकेंगे। संबंधित लोगों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई भी होगी।
दिवाली के बाद भी प्रदूषण पर रहेगी नजर
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को दिवाली के दौरान और उसके बाद वायु गुणवत्ता की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। मंडल रोजाना प्रदूषण के स्तर की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगा। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य त्योहार के दौरान प्रदूषण में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। प्रशासन ने लोगों से भी निर्धारित नियमों का पालन करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन ने लोगों से भी निर्धारित नियमों का पालन करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की है।
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