बाड़मेर: खाना नहीं बनाने पर सगे भाई की कुल्हाड़ी से हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद; 50 हजार का जुर्माना
बाड़मेर में खाना नहीं बनाने की बात पर हुए विवाद में सगे भाई की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-2 की न्यायाधीश मीनाक्षी मीणा ने आरोपी रेवंताराम पुत्र पुनमाराम को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी माना। कोर्ट ने उस पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं कराने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले में अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों के बयान और 32 दस्तावेज पेश किए थे।

मुख्य बातें
- खाना नहीं बनाने की बात पर विवाद के बाद रेवंताराम ने अपने भाई भोमाराम की कुल्हाड़ी से हत्या की थी।
- घटना 23 अगस्त 2024 को बाड़मेर के नागाणा थाना क्षेत्र में हुई थी।
- अदालत ने उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
BARMER, 05 NOV. 2026:
खाना नहीं बनाने पर हुआ था विवाद
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 अगस्त 2024 को गुसाईराम ने नागाणा पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि सुबह करीब 8 बजे रेवंताराम उसके घर के पास आया। उसने गुसाईराम और उसके भाइयों को बुलाकर बताया कि उसने भोमाराम को कुल्हाड़ी मार दी है। इसके बाद गुसाईराम अपने भाई विशनाराम और काका झुंझाराम के साथ रेवंताराम के घर पहुंचा। वहां आंगन में चारपाई के पास खून पड़ा था। घर के बाहर से देखने पर पास बने बाथरूम में भोमाराम का शव दिखाई दिया।
बाथरूम में मिला था भोमाराम का शव
रिपोर्ट के मुताबिक, आवाज देने पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रेवंताराम ने अपने सगे भाई भोमाराम पुत्र पुनमाराम पर कुल्हाड़ी से वार कर उसकी हत्या कर दी थी। बताया गया कि दोनों भाई अविवाहित थे और उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
17 गवाहों और 32 दस्तावेजों के आधार पर फैसला
पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपी रेवंताराम के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके अलावा 32 दस्तावेज और तीन आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी माना। न्यायाधीश मीनाक्षी मीणा ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
50 हजार रुपए का अर्थदंड, नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। आदेश के अनुसार, अर्थदंड जमा नहीं कराने पर उसे एक महीने का साधारण कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा। मामले में राज्य पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहनलाल पूनड ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की बहस पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया।
पुलिस का पक्ष
पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपी रेवंताराम के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
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