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ध्रुव राठी का तंज: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बहाने शिक्षा व्यवस्था और राजनीति पर निशाना

सोशल मीडिया पर वायरल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने खुलकर समर्थन जताते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कैंपेन को युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बताया और सुझाव दिया कि इसके मैनिफेस्टो में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल की जानी चाहिए।

युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बना सटायरिकल कैंपेन

ध्रुव राठी ने अपने हालिया वीडियो में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को किसी राजनीतिक साजिश से जोड़ने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह कोई संगठित अभियान नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भीतर बढ़ती निराशा और गुस्से की अभिव्यक्ति है। राठी के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था से असंतोष अब सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस कैंपेन को मजाक या साजिश के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकेत के तौर पर देखें, जो सिस्टम में बदलाव की मांग को दर्शाता है।

शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी पर उठाए सवाल

वीडियो में राठी ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और खासकर शिक्षा प्रणाली की खामियों को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है और इससे युवाओं में गहरी निराशा पैदा हुई है। उनके मुताबिक, जब मेहनत के बावजूद पारदर्शिता नहीं दिखती, तो आक्रोश स्वाभाविक है। राठी ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह सीधे देश के भविष्य से जुड़ा मामला है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठाई मांग

ध्रुव राठी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मैनिफेस्टो को लेकर एक सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह मंच युवाओं की आवाज बन रहा है, तो इसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल की जानी चाहिए। उनके अनुसार, हालिया विवादों के बाद जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। राठी ने यह बात स्पष्ट की कि यह मांग व्यक्तिगत नहीं बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

हल्के अंदाज में दिया समर्थन, लेकिन संदेश गंभीर

वीडियो के अंत में ध्रुव राठी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे भी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सदस्य बनना चाहेंगे। हालांकि उनका यह बयान व्यंग्यात्मक था, लेकिन इसके पीछे का संदेश गंभीर था। उन्होंने संकेत दिया कि युवा अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए तरीकों से अपनी बात रख रहे हैं। राठी के मुताबिक, यह ट्रेंड केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो असंतोष और बढ़ सकता है।

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