कान्हा में ‘टाइगर अलर्ट’! रहस्यमयी वायरस से 6 बाघों की मौत, 100 से ज्यादा टाइगर्स की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट
मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक छह बाघों की मौत के बाद पूरे टाइगर रिजर्व को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जांच में सीडीवी (कैनाइन डिस्टेंपर वायरस) संक्रमण की पुष्टि होने के बाद बाघों की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर निगरानी, सैंपलिंग और टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्ते इस संक्रमण के सबसे बड़े वाहक बन सकते हैं।
सीडीवी वायरस बना बाघों के लिए बड़ा खतरा
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों सहित कई बाघों की मौत के बाद जांच में सीडीवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह वायरस सामान्य रूप से कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन जंगली मांसाहारी जानवरों तक भी तेजी से फैल सकता है। वन अधिकारियों के अनुसार यह बीमारी बेहद संक्रामक है और संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से फैलती है। यही कारण है कि रिजर्व क्षेत्र में मौजूद हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह संक्रमण अन्य वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।
बेंगलुरु से पहुंची विशेषज्ञ टीम, शुरू हुआ वैज्ञानिक अध्ययन
वायरस के फैलाव की गंभीरता को देखते हुए बेंगलुरु से वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम कान्हा पहुंची है। टीम ने रिजर्व के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और बिल्लियों का वैज्ञानिक सीरो-सर्विलांस अध्ययन करने की सिफारिश की है। इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि संक्रमण किन स्रोतों से फैल रहा है और इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है। विशेषज्ञों ने जंगल के आसपास कचरा प्रबंधन को सख्त करने, जल स्रोतों की निगरानी बढ़ाने और मांसाहारी वन्यजीवों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की सलाह दी है। टीम लगातार फील्ड अधिकारियों के साथ मिलकर संक्रमण नियंत्रण रणनीति पर काम कर रही है।
2500 कुत्तों के टीकाकरण की तैयारी
वन विभाग ने कान्हा रिजर्व के आसपास के गांवों में रहने वाले करीब 2500 पालतू और आवारा कुत्तों के टीकाकरण का अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का मानना है कि संक्रमित कुत्ते ही इस वायरस को बाघों तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम बन सकते हैं। इसी वजह से गांव स्तर पर पशु स्वास्थ्य निगरानी भी बढ़ाई जा रही है। पशु चिकित्सकों की टीम लगातार इलाके में कैंप लगाकर कुत्तों की जांच और वैक्सीनेशन की तैयारी कर रही है। विभाग का उद्देश्य संक्रमण की चेन को गांवों से ही रोकना है ताकि जंगल के भीतर इसका असर कम किया जा सके।
बाघों की गतिविधियों पर चौबीस घंटे नजर
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित की गई है, जो बाघों की हर गतिविधि पर नजर रख रही है। फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी बाघ में कमजोरी, लड़खड़ाहट, आक्रामक व्यवहार, शरीर पर नियंत्रण खोना या भोजन में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत रिपोर्ट करें। रिजर्व के लगभग 10 प्रतिशत बाघों को ट्रैंकुलाइज कर उनके सैंपल लेने की योजना भी बनाई गई है। कई पर्यटन मार्ग अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं ताकि वन्यजीवों की निगरानी में कोई बाधा न आए और संक्रमण का खतरा सीमित रखा जा सके।
एनटीसीए ने सराहा वन विभाग का त्वरित एक्शन
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की जांच टीम ने कान्हा प्रबंधन द्वारा उठाए गए शुरुआती कदमों की सराहना की है। अधिकारियों के अनुसार 18 अप्रैल को एक बीमार बाघ के वीडियो सामने आने के तुरंत बाद वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया था। इसके बाद हाथियों के दस्ते, पशु चिकित्सकों और वनकर्मियों सहित 50 से अधिक कर्मचारियों को निगरानी में लगाया गया। जांच टीम ने विभिन्न जल स्रोतों और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और पाया कि रिजर्व की कैमरा ट्रैप एवं निगरानी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर रही है। फिलहाल दूसरे मांसाहारी जीवों में संक्रमण के संकेत नहीं मिले हैं।