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RAS पिंकी मीणा को हाईकोर्ट से राहत, लेकिन भ्रष्टाचार केस बना चुनौती

राजस्थान की चर्चित RAS अधिकारी पिंकी मीणा को लंबे समय बाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब साढ़े पांच साल से निलंबित चल रहीं पिंकी मीणा के सस्पेंशन आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हालांकि अदालत की इस राहत के बावजूद उनके खिलाफ चल रहा भ्रष्टाचार का मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पिंकी मीणा भविष्य में अपनी सरकारी नौकरी बचा पाएंगी या नहीं। यह मामला एक बार फिर राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई को लेकर चर्चा में आ गया है।

पहली पोस्टिंग में ही रिश्वत केस में फंसीं पिंकी मीणा

वर्ष 2017 बैच की RAS अधिकारी पिंकी मीणा की पहली पोस्टिंग दौसा जिले के बांदीकुई में SDM के रूप में हुई थी। आरोप है कि जनवरी 2021 में उन्होंने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़ी कंपनी से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए उन्हें 10 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इसी मामले में तत्कालीन SDM पुष्कर मित्तल और उस समय के दौसा एसपी मनीष अग्रवाल भी जांच के घेरे में आए। पहली ही पोस्टिंग में ट्रैप होने के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था।

शादी के लिए मिली जमानत, फिर जाना पड़ा जेल

गिरफ्तारी के बाद पिंकी मीणा न्यायिक हिरासत में चली गई थीं। इसी दौरान उन्होंने अपनी शादी के लिए अदालत से अंतरिम जमानत मांगी। कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की राहत दी, जिसके बाद फरवरी 2021 में उन्होंने RJS अधिकारी नरेंद्र सिंह से विवाह किया। शादी के बाद उन्हें दोबारा जेल लौटना पड़ा। यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा क्योंकि एक तरफ रिश्वत प्रकरण की जांच चल रही थी और दूसरी तरफ उनकी शादी को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही थी।

हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पिंकी मीणा पिछले पांच वर्षों से लगातार निलंबित थीं और विभागीय कार्रवाई में अत्यधिक देरी हुई। अदालत ने यह भी माना कि इसी मामले के सह-आरोपी पुष्कर मित्तल को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए कानूनी समानता के आधार पर पिंकी मीणा को भी अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निलंबन समीक्षा समिति उनके सस्पेंशन को लगातार जारी रखने के पीछे ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसके बाद अदालत ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी।

नौकरी बहाल, लेकिन कानूनी लड़ाई बाकी

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिंकी मीणा की सेवा बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दर्ज केस अब भी जारी रहेगा। यदि जांच और ट्रायल के दौरान आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनकी सरकारी नौकरी पर गंभीर खतरा खड़ा हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का दोष सिद्ध होने पर सेवा समाप्ति सहित कई कठोर कार्रवाई संभव है। ऐसे में फिलहाल मिली राहत को अंतिम जीत नहीं माना जा सकता।

ब्यूरोक्रेसी में फिर शुरू हुई चर्चा

पिंकी मीणा केस एक बार फिर राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक निलंबन, हाईप्रोफाइल गिरफ्तारी, शादी और फिर अदालत से राहत जैसे घटनाक्रमों ने इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। अब सबकी नजर आने वाले समय में कोर्ट की सुनवाई और भ्रष्टाचार मामले की जांच पर टिकी है। यदि मामले में दोष साबित होता है तो यह राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए बड़ा संदेश माना जाएगा, वहीं बरी होने की स्थिति में पिंकी मीणा को पूरी तरह सेवा में वापसी का रास्ता मिल सकता है।

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