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यूपी चुनाव 2027 पर कांग्रेस का बड़ा दांव, राहुल गांधी होंगे चेहरा, बदलेगी सियासी रणनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस अब नई रणनीति के साथ वापसी की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपना पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर केंद्रित कर दिया है। इस बार कांग्रेस प्रियंका गांधी की जगह राहुल गांधी को मुख्य चेहरा बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी को लगता है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी की राजनीतिक कमजोरी सामने आई है और इसी मौके को भुनाकर वह राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। कांग्रेस की यह रणनीति समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकती है।

राहुल गांधी पर दांव, प्रियंका गांधी की भूमिका सीमित

अब तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति का केंद्र प्रियंका गांधी वाड्रा रही हैं, लेकिन पार्टी को उनके नेतृत्व में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। यही वजह है कि कांग्रेस अब राहुल गांधी को यूपी की राजनीति का प्रमुख चेहरा बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि राहुल गांधी सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, किसानों और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे हैं, जिससे उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। कांग्रेस चाहती है कि यूपी से लेकर 2029 के लोकसभा चुनाव तक राहुल गांधी के नेतृत्व में एक मजबूत राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जाए।

समाजवादी पार्टी से बड़ी राजनीतिक ‘कुर्बानी’ की उम्मीद

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि समाजवादी पार्टी अपनी पारंपरिक यादव-मुस्लिम राजनीति की सीमा तक पहुंच चुकी है और अब उसके विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। ऐसे में कांग्रेस गठबंधन के भीतर अधिक राजनीतिक हिस्सेदारी चाहती है। पार्टी का दावा है कि मुसलमान मतदाता अब राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस को अधिक प्रभावी विकल्प मानने लगे हैं। इसी वजह से कांग्रेस आगामी चुनावों में सपा से ज्यादा सीटों और अधिक राजनीतिक स्पेस की उम्मीद कर रही है। इससे दोनों दलों के बीच भविष्य में सीट बंटवारे को लेकर तनाव भी बढ़ सकता है।

गैर-यादव OBC और EBC वोट बैंक पर नजर

कांग्रेस इस बार केवल पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी की नजर गैर-यादव पिछड़ी जातियों, अति पिछड़े वर्ग और किसानों पर भी है। कांग्रेस नेताओं को लगता है कि इन वर्गों में बीजेपी के प्रति नाराजगी बढ़ रही है, लेकिन वे समाजवादी पार्टी के साथ सहज महसूस नहीं करते। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस जल्द ही OBC, EBC, किसान और मजदूर समुदायों के साथ संवाद अभियान शुरू करने की तैयारी में है। पार्टी को उम्मीद है कि सामाजिक न्याय और आर्थिक मुद्दों के जरिए वह नए मतदाताओं को जोड़ सकेगी।

BSP के वोट बैंक पर भी कांग्रेस की नजर

कांग्रेस को यह भी महसूस हो रहा है कि बहुजन समाज पार्टी की सक्रियता पहले जैसी नहीं रही और इसका असर उसके जनाधार पर पड़ रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि दलित वोट बैंक का एक हिस्सा नया राजनीतिक विकल्प तलाश रहा है। कांग्रेस इसी खाली जगह को भरने की कोशिश कर रही है। संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर पार्टी दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इससे BSP की सियासी चुनौती और बढ़ सकती है।

बीजेपी को घेरने की तैयारी में कांग्रेस

कांग्रेस का मानना है कि एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में रहने के कारण बीजेपी को एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी को उम्मीद है कि बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के मुद्दे और सामाजिक न्याय जैसे सवाल आने वाले चुनावों में निर्णायक बन सकते हैं। कांग्रेस यह भी मान रही है कि यूपी के कुछ सवर्ण वर्गों में भी बीजेपी को लेकर नाराजगी बढ़ी है, जिसका फायदा विपक्ष उठा सकता है। इसी कारण पार्टी अब राज्य में आक्रामक और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।

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