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हमजा बुरहान के खात्मे से नहीं भरा जख्म, शहीद रतन ठाकुर के पिता बोले- आतंक की जड़ खत्म हो

पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े आतंकी हमजा बुरहान के मारे जाने की खबर के बाद देशभर में राहत की भावना है, लेकिन शहीद CRPF जवान रतन ठाकुर के परिवार के लिए यह खबर पुराने जख्मों को फिर से ताजा कर गई। शहीद के पिता रामनिरंजन ठाकुर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन बेटे की शहादत का दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि देश के दुश्मनों और आतंकी सरगनाओं का पूरी तरह सफाया होना चाहिए।

बेटे की शहादत का दर्द आज भी जिंदा

Pulwama attack में शहीद हुए CRPF जवान Ratan Thakur के पिता रामनिरंजन ठाकुर ने कहा कि हमजा बुरहान के मारे जाने से थोड़ी संतुष्टि जरूर मिली है, लेकिन यह उनके बेटे की कमी को कभी पूरा नहीं कर सकता। उनका कहना है कि जब भी किसी आतंकी के मारे जाने की खबर आती है, तब उन्हें अपने बेटे की याद और ज्यादा सताने लगती है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि देश के कई घरों को उजाड़ा है और ऐसी ताकतों के खिलाफ लगातार कठोर कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति की मांग

रामनिरंजन ठाकुर ने कहा कि देश की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने कई निर्दोष परिवारों की जिंदगी बर्बाद की है। उन्होंने मांग की कि आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार को और सख्त कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि जब तक आतंकवाद के सरगनाओं और उनके नेटवर्क का पूरी तरह सफाया नहीं होगा, तब तक शहीद जवानों की आत्मा को वास्तविक शांति नहीं मिल सकती। उन्होंने यह भी कहा कि देश के जवानों की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए।

अधूरे वादों का दर्द भी कायम

शहीद रतन ठाकुर परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। पिता ने बताया कि हमले के बाद नेताओं और अधिकारियों ने कई वादे किए थे, लेकिन उनमें से कई आज भी अधूरे हैं। हालांकि परिवार के छोटे बेटे को राज्य सरकार की ओर से नौकरी मिली, जिससे कुछ सहारा जरूर मिला है। लेकिन परिवार का कहना है कि कई घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं। रामनिरंजन ठाकुर ने भावुक होकर कहा कि जिस बेटे को उन्होंने बड़े अरमानों से पाला था, उसकी शहादत के बाद जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

हर 14 फरवरी को बेटे को देते हैं श्रद्धांजलि

पुलवामा हमले की तारीख 14 फरवरी परिवार के लिए आज भी बेहद भावुक दिन है। रामनिरंजन ठाकुर हर साल अपने स्तर पर बेटे की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि बेटे के बलिदान को याद रखने का संकल्प है। रतन ठाकुर ने साल 2011 में CRPF जॉइन की थी और परिवार को उन पर हमेशा गर्व रहा। गांव और आसपास के लोग भी हर साल श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होकर शहीद को नमन करते हैं।

आखिरी फोन कॉल आज भी याद

शहीद की पत्नी राजनंदनी के लिए 13 फरवरी 2019 की शाम आज भी यादों में ताजा है। रतन ठाकुर ने उस दिन फोन पर बताया था कि वे श्रीनगर की ओर जा रहे हैं। अगले दिन टीवी पर हमले की खबर आने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई। जब संपर्क नहीं हो पाया और मोबाइल बंद मिला, तब परिवार को अनहोनी का अंदेशा हो गया था। बाद में शहादत की पुष्टि होते ही पूरा परिवार टूट गया। परिवार का कहना है कि समय गुजर गया, लेकिन उस दिन का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है।

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