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CJI पर विवादित टिप्पणी से घिरी केरल कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत को रिट याचिका के रूप में किया दर्ज

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित विवादित टिप्पणी को लेकर केरल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के आधिकारिक एक्स हैंडल पर 12 अक्टूबर 2026 को एक पोस्ट साझा की गई थी। इसमें सीजेआई से इस्तीफा देने की बात कही गई थी। बाद में पोस्ट हटा दी गई। इस मामले में वकील विनीत जिंदल ने सीजेआई को शिकायत भेजकर अवमानना की कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, शिकायत को 30 अक्टूबर को रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया है। मामले पर 6 नवंबर को सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट , STV NEWS

मुख्य बातें

  • CJI सूर्यकांत पर पोस्ट से बढ़ा विवाद, केरल कांग्रेस के खिलाफ याचिका दर्ज
  • सीजेआई से इस्तीफा मांगने वाली पोस्ट पर घिरी केरल कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
  • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी का मामला, केरल कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें

KERAL,02NOV. 2026:

सीजेआई सूर्यकांत पर पोस्ट को लेकर विवाद

यह विवाद 12 अक्टूबर 2026 को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर प्रकाशित एक पोस्ट से शुरू हुआ। पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफा देने की बात कही गई थी। इसमें लिखा गया था कि यदि कानून-व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदारी देने की बात भी कही गई थी। इस पोस्ट को लेकर विवाद बढ़ने के बाद इसे सोशल मीडिया से हटा दिया गया।

वकील विनीत जिंदल ने सीजेआई को भेजी शिकायत

इस मामले में वकील विनीत जिंदल ने 13 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश को शिकायत भेजी थी। उन्होंने केरल कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए अवमानना की कार्रवाई पर विचार करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, इस शिकायत को 30 अक्टूबर को रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया। इसमें केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को प्रतिवादी बनाया गया है। वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले की सुनवाई 6 नवंबर को होने की संभावना है।

शिकायत में न्यायपालिका की गरिमा का उठाया मुद्दा

विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद एक संवैधानिक और स्वतंत्र न्यायिक पद है। इस पद पर बने रहने को किसी राजनीतिक संगठन की सहमति या नाराजगी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। शिकायत में तर्क दिया गया कि किसी राजनीतिक दल को न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह की टिप्पणी करते समय संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। याचिकाकर्ता ने इस बयान के कानूनी पहलुओं की जांच की मांग की है।

अभिव्यक्ति की आजादी और अदालत की अवमानना पर बहस

शिकायत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें कहा गया कि नागरिकों और राजनीतिक संगठनों को न्यायिक फैसलों, टिप्पणियों और संस्थागत कामकाज की आलोचना करने का अधिकार है। हालांकि, यह अधिकार संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। शिकायतकर्ता के अनुसार, जायज आलोचना और ऐसा आचरण जिसमें अदालत के अधिकार को कमजोर करने या न्याय प्रशासन में बाधा पहुंचाने की आशंका हो, दोनों के बीच अंतर करना जरूरी है। इसी आधार पर पोस्ट की कानूनी समीक्षा की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास प्रदर्शन का भी किया जिक्र

विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास हुए राजनीतिक प्रदर्शन का भी उल्लेख किया है। उन्होंने सीजेआई का ध्यान कांग्रेस नेताओं और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी तथा नारेबाजी की ओर दिलाया। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रदर्शन में राहुल गांधी सहित अन्य राजनीतिक पदाधिकारी भी शामिल बताए गए। हालांकि, शिकायत में यह स्पष्ट किया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना या वैध स्थान पर राजनीतिक नारे लगाना अपने आप में अदालत की अवमानना अथवा अपराध नहीं माना जा सकता।

बिना शर्त माफी के बाद फिर चर्चा में आया मामला

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से सीजेआई से बिना शर्त माफी मांगने की बात भी सामने आई थी। अब शिकायत को रिट याचिका के रूप में दर्ज किए जाने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। हालांकि, शिकायत दर्ज होना अपने आप में अवमानना साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति सुनवाई और अदालत के रुख से स्पष्ट होगी।

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