झुंझुनूं हादसा: सड़क बनाते समय कैसे गई 8 लोगों की जान? ठेकेदार भी नहीं बचा
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सीसी सड़क निर्माण के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सीमेंट मिक्सर मशीन को धक्का देकर दूसरी जगह ले जा रहे ग्रामीण और मजदूर 11 हजार केवी की बिजली लाइन की चपेट में आ गए। हादसे में ठेकेदार विष्णु सैनी समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ग्रामीणों ने बिजली लाइन की स्थिति और बिजली बंद कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं, हादसे के बाद मुआवजे की मांग को लेकर धरना भी दिया गया।

मुख्य बातें
- झुंझुनूं में सड़क निर्माण बना मातम की वजह, करंट से 8 मौतें
- छापोली हादसा: मशीन धकेलते ही दौड़ा करंट, 8 की जान गई
- 11 हजार केवी लाइन की चपेट में आई मिक्सर मशीन, गांव में मातम
JHUNJUNU,02 NOV. 2026:
1. ग्रामीणों के सहयोग से बन रही थी सड़क, निर्माण के दौरान हादसा
झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में जिस सड़क का निर्माण ग्रामीणों के आपसी सहयोग से कराया जा रहा था, वही हादसे की वजह से गहरे दुख का कारण बन गई। ग्रामीणों के मुताबिक, तीर्थस्थल कदम कुंड जाने वाला रास्ता लंबे समय से खराब था। इसके बाद गांव के लोगों ने चंदा जुटाकर सीसी सड़क बनवाने का निर्णय लिया। करीब तीन-चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। हालांकि, काम बीच-बीच में रुकता रहा। सोमवार को भी निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया था। इसी दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया।
2. सीमेंट मिक्सर मशीन को धक्का देते समय दौड़ा करंट
निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट मिक्सर मशीन को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था। घायल गिदाराम सैनी के अनुसार, कई लोग मिलकर मशीन को धक्का दे रहे थे। इसी दौरान मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलने के बाद आसपास मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आ गए। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
3. मृतकों में सड़क निर्माण का ठेकेदार भी शामिल
इस हादसे में सड़क निर्माण का काम कर रहे ठेकेदार विष्णु सैनी (38) की भी जान चली गई। उनके अलावा हरिराम गुर्जर (30), मंगलचंद गुर्जर (22), कालूराम गुर्जर (29), पवन गुर्जर (23), सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी (30), मुकेश सैनी (27) और नितेश सैनी (32) की मौत हुई। एक साथ आठ लोगों की मौत से छापोली गांव में शोक का माहौल है। हादसे ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों में घटना को लेकर दुख के साथ आक्रोश भी है।
4. बिजली लाइन की ऊंचाई और शिफ्टिंग पर ग्रामीणों के सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि 11 हजार केवी की बिजली लाइन पहले सड़क से दूर थी। कुछ दिन पहले इसे बदलकर रास्ते के ऊपर से निकाला गया था। उनका कहना है कि तार काफी नीचे थे। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने बिजली आपूर्ति बंद कराने के लिए फोन भी किया था। लेकिन जीएसएस पर कर्मचारी मौजूद नहीं होने की बात सामने आई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पहले दो बार रुकवाया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और हादसे की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
5. शवों के साथ धरना, 21 सदस्यीय संघर्ष समिति गठित
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मृतकों के शवों के साथ धरना शुरू कर दिया। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने 21 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया। स्थिति को देखते हुए गांव में पुलिस के साथ आरएसी के जवान भी तैनात किए गए। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा मौके पर पहुंचे और संघर्ष समिति के सदस्यों से बातचीत की। इससे पहले मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। ग्रामीणों की मांगों और हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ी।
6. मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई ग्रामीणों की मांग
कदम कुंड क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी मोटरसाइकिल से स्टेट हाईवे पहुंचे। वहां से मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर हादसे और मृतकों के परिजनों की मांगों की जानकारी दी गई। इस दौरान प्रभावित परिवारों की सहायता और उनकी मांगों को लेकर चर्चा हुई। हादसे के बाद ग्रामीण आर्थिक सहायता के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठा रहे हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई और हादसे की जांच पर टिकी है।
7. मृतक परिवारों को सहायता, 20 से 25 लाख मुआवजे की मांग
हादसे में घायल महेंद्र सैनी, गीता देवी, संतरा देवी, गिदाराम सैनी और मंजू देवी का उपचार जारी है। खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपए और घायलों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की जानकारी दी गई है। वहीं, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने प्रत्येक मृतक परिवार को 20 से 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई। ग्रामीणों की मांगों और सहायता को लेकर आगे के फैसलों का इंतजार है।
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