चिनाब नदी में बढ़ा जलस्तर, पाकिस्तान ने भारत पर लगाए आरोप; आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के बाद चिनाब नदी में जलस्तर बढ़ने से पाकिस्तान के कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने की खबर है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया है कि भारत से अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का बहाव तेजी से बढ़ा। हालांकि, भारत की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को चिनाब नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ समय के लिए इसका प्रवाह लगभग 1.80 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। पंजाब सिंचाई विभाग के अधिकारियों का दावा है कि कश्मीर क्षेत्र में भारी बारिश के बाद नदी में अचानक पानी बढ़ा, जिससे कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। पाकिस्तान मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में चिनाब, झेलम और रावी नदी प्रणाली में जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई है।
भारत पर पूर्व सूचना नहीं देने का आरोप
पाकिस्तानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि भारत की ओर से पानी के बहाव में वृद्धि या भारी वर्षा की स्थिति को लेकर पहले से कोई सूचना साझा नहीं की गई। उनके अनुसार, इससे स्थानीय प्रशासन को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मानसून भी बना जलस्तर बढ़ने की बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमालयी क्षेत्रों में भारी वर्षा होने पर चिनाब समेत कई नदियों का जलस्तर स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ सकता है। पाकिस्तान मौसम विभाग ने भी 20 से 24 जुलाई के बीच सक्रिय मानसूनी प्रणाली के कारण प्रमुख नदियों और उनकी सहायक धाराओं में जलप्रवाह बढ़ने की चेतावनी जारी की है। इसलिए बाढ़ की स्थिति के पीछे केवल सीमा पार से आने वाले पानी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय मौसम संबंधी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
सिंधु जल संधि को लेकर जारी है तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत जल प्रवाह से जुड़ी सूचनाएं साझा नहीं कर रहा, जबकि भारत का कहना रहा है कि वह संधि के प्रावधानों और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग करने का अधिकार रखता है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
स्थिति पर बनी हुई है नजर
फिलहाल पाकिस्तान के संबंधित विभाग प्रभावित इलाकों में जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। वहीं भारत की ओर से पानी छोड़े जाने या पाकिस्तान के आरोपों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।