महिला सुरक्षा के लिए डूंगरपुर पुलिस की नई पहल, 2200 से ज्यादा लोग जुड़े; महिलाओं को सीधे पुलिस से जोड़ने की कोशिश
डूंगरपुर में महिला और बालिका सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस ने सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की नई पहल शुरू की है। जिला पुलिस की ओर से शुरू किए गए ‘महिला यूथ सामुदायिक संपर्क समूह (महिला यूथ सीएलजी)’ के जरिए महिलाओं और पुलिस के बीच संवाद को मजबूत किया जा रहा है। अब तक इस अभियान से 2200 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जबकि करीब 300 महिलाएं और बालिकाएं महिला यूथ सीएलजी का हिस्सा बनी हैं।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात सीधे पुलिस तक पहुंचाने का मंच देना और स्थानीय स्तर पर जागरूकता के साथ अपराध रोकथाम में आमजन की भागीदारी बढ़ाना है।
चारों वृत्त कार्यालयों में महिलाओं से हुआ संवाद
जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में महिला सुरक्षा और जागरूकता को लेकर यह अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 2 सितंबर 2026 को जिला मुख्यालय सहित जिले के चारों वृत्त कार्यालयों पर महिला यूथ सीएलजी सदस्यों के साथ बैठकें आयोजित की गईं।
बैठकों में महिला प्रतिनिधियों, युवतियों और पुलिस अधिकारियों ने महिला एवं बालिका सुरक्षा से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। पुलिस ने महिला यूथ सीएलजी को पुलिस और समाज के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास बढ़ाने वाली कड़ी के रूप में विकसित करने की बात कही।
महिलाओं की आवाज सीधे पुलिस तक पहुंचाने पर जोर
महिला यूथ सीएलजी से जुड़ी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी। जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता लेने और किसी भी घटना की जानकारी समय पर पुलिस तक पहुंचाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुलिस गश्त, निगरानी और अन्य पुलिसिंग व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।
जीरो FIR और POCSO एक्ट की दी जानकारी
बैठकों के दौरान महिलाओं को महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। इनमें जीरो FIR, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम और POCSO एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल रहे।
इसके अलावा घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, साइबर अपराध, सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध, ऑनलाइन ठगी और बालिकाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी जागरूक किया गया।
पुलिस ने महिलाओं को आपात स्थिति में सहायता के लिए 112 और महिला हेल्पलाइन 1090 की जानकारी भी दी। पुलिस ने अपील की कि किसी भी तरह की हिंसा, उत्पीड़न या खतरे की स्थिति में चुप रहने के बजाय तत्काल सहायता ली जाए।
CCTV कैमरे बढ़ाने का सुझाव
बैठक में महिला यूथ सीएलजी सदस्यों ने अपने क्षेत्रों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दे पुलिस अधिकारियों के सामने रखे। महिलाओं ने मुख्य सड़कों और चौराहों पर CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई।
स्कूल और कॉलेजों के आसपास निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव भी दिया गया। इसके अलावा महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस और महिला यूथ सीएलजी के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
पुलिस बोली- महिला सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी
बैठक में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पुलिस के मुताबिक, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर सुरक्षा संबंधी समस्याओं की पहचान करने, जागरूकता बढ़ाने और अपराधों की रोकथाम में मदद मिल सकती है।
महिला यूथ सीएलजी के माध्यम से पुलिस का प्रयास महिलाओं की समस्याओं को सीधे पुलिस तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी देना भी है।
2200 से ज्यादा लोग अभियान से जुड़े
डूंगरपुर पुलिस के अनुसार महिला सुरक्षा और जागरूकता से जुड़ी इस मुहिम से अब तक 2200 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। इनमें करीब 300 महिलाएं और बालिकाएं महिला यूथ सीएलजी के माध्यम से पुलिस के साथ समन्वय कर रही हैं।
पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में इस नेटवर्क को और विस्तार दिया जाएगा। इसका उद्देश्य महिला और बाल सुरक्षा के मामलों में पुलिस और आमजन के बीच सहयोग बढ़ाना है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं तक सहायता समय पर पहुंच सके और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।