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भारत-ब्रिटेन FTA से बदल सकता है एशिया का व्यापार संतुलन, पाकिस्तान-बांग्लादेश पर बढ़ेगा दबाव

भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते के बाद भारत को टेक्सटाइल, प्रोसेस्ड फूड और अन्य प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में टैरिफ का बड़ा फायदा मिलेगा। विश्लेषण के अनुसार, इसका सीधा असर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर पड़ सकता है, जिनकी ब्रिटेन बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे एशिया के व्यापारिक संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

भारत-ब्रिटेन FTA से बढ़ेगा भारत का एक्सपोर्ट फायदा

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ यह FTA तीन साल की बातचीत के बाद अंतिम रूप में पहुंचा है। समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में कम टैरिफ का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। विशेष रूप से टेक्सटाइल, प्रोसेस्ड फूड, फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर गुड्स जैसे क्षेत्रों में भारत की पकड़ और मजबूत होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत पहले से ही ब्रिटेन को बड़े स्तर पर निर्यात कर रहा है, और अब यह बढ़त और अधिक मजबूत हो सकती है।

बांग्लादेश और पाकिस्तान पर बढ़ेगा प्रतिस्पर्धी दबाव

विश्लेषण से संकेत मिलता है कि इस समझौते का सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश और पाकिस्तान पर पड़ सकता है। बांग्लादेश के टेक्सटाइल निर्यात, जो ब्रिटेन बाजार में उसकी ताकत माना जाता है, पर सबसे अधिक दबाव बनने की आशंका है। वहीं पाकिस्तान के कुछ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक हिस्सेदारी भी प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ब्रिटेन बाजार में भारत की बढ़ती पहुंच इन देशों के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है, जिससे उनकी निर्यात रणनीति पर असर पड़ सकता है।

प्रमुख सेक्टर जहां देखने को मिलेगा असर

इस FTA का सबसे बड़ा प्रभाव टेक्सटाइल, चावल, प्रोसेस्ड फूड, केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में भारत पहले से ही मजबूत स्थिति में है और अब टैरिफ लाभ मिलने से उसकी स्थिति और बेहतर होने की संभावना है। खासकर चावल और टेक्सटाइल जैसे उत्पादों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अन्य एशियाई देशों की तुलना में अधिक स्पष्ट हो सकती है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी बदलाव की संभावना बढ़ जाती है।

एशिया के व्यापारिक समीकरण में संभावित बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-ब्रिटेन FTA केवल दो देशों के बीच व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह पूरे एशिया के व्यापारिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। भारत की मजबूत होती निर्यात क्षमता और टैरिफ लाभ के कारण बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों को अपने पारंपरिक बाजार हिस्सों में दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इससे एशियाई देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक व्यापारिक संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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