रेलवे मरीजों के इलाज में डेढ़ करोड़ का घोटाला! CBI ने दर्ज किया केस, अस्पताल और कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप
इलाज के नाम पर फर्जी क्लेम का बड़ा खुलासा
जोधपुर में रेलवे कर्मचारियों के मेडिकल रिइम्बर्समेंट से जुड़े मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रेलवे अस्पताल की शिकायत के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक निजी अस्पताल के निदेशक और रेलवे के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच रेलवे से रेफर होकर आए मरीजों के इलाज के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के गलत क्लेम उठाए गए। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
निजी अस्पताल और रेलवे के बीच हुआ था एमओयू
जानकारी के अनुसार जोधपुर डिवीजनल रेलवे अस्पताल और एक निजी अस्पताल के बीच सितंबर 2022 से 2024 तक रेलवे कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए समझौता हुआ था। इस व्यवस्था के तहत रेलवे से रेफर किए गए मरीजों का इलाज निजी अस्पताल में किया जाना था और बाद में अस्पताल की ओर से इलाज से जुड़े बिल रेलवे को भुगतान के लिए भेजे जाते थे। लेकिन शिकायतों के बाद हुई जांच में इलाज और भुगतान के दस्तावेजों में कई अंतर सामने आए हैं।
मरीजों को नहीं मिली दवाइयां, फिर भी उठाए गए बिल
CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई मामलों में अस्पताल की ओर से पेश किए गए मेडिकल रिकॉर्ड और मरीजों को दिए गए वास्तविक बिलों में अंतर था। जांच अधिकारियों के अनुसार कुछ मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती होने के बावजूद दस्तावेजों में आईसीयू या सीसीयू में इलाज दिखाया गया। इसके अलावा कई ऐसी दवाइयों के बिल भी लगाए गए, जो मरीजों को वास्तव में दी ही नहीं गई थीं। इससे क्लेम राशि बढ़ाने की आशंका जताई गई है।
डिस्चार्ज समरी और दस्तावेजों में मिली गड़बड़ी
जांच के दौरान अस्पताल रिकॉर्ड में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। CBI के अनुसार कुछ मरीजों की डिस्चार्ज समरी और क्लेम के लिए लगाए गए दस्तावेजों में अंतर पाया गया। कई मेडिकल फाइलों में डॉक्टरों के हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दवा चार्ट में बदलाव कर अतिरिक्त दवाइयां जोड़ने और क्लेम राशि बढ़ाने की कोशिश की गई हो सकती है।
रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
CBI ने अपनी प्रारंभिक जांच के आधार पर आशंका जताई है कि इतनी बड़ी राशि के भुगतान के लिए निजी अस्पताल और रेलवे के कुछ कर्मचारियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। एजेंसी ने इस मामले में निजी अस्पताल के निदेशक, रेलवे अस्पताल जोधपुर के अज्ञात लोक सेवकों और अन्य संदिग्ध लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि फर्जी क्लेम तैयार करने और भुगतान कराने में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
CBI ने शुरू की मामले की गहन जांच
CBI जोधपुर शाखा के अधिकारियों ने मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी है। जांच टीम अस्पताल के रिकॉर्ड, मरीजों की फाइलें, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और रेलवे विभाग के संबंधित रिकॉर्ड खंगाल रही है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले में शामिल लोगों और नुकसान की वास्तविक राशि का खुलासा हो सकेगा।