कमलेश प्रजापत एनकाउंटर केस: IPS सहित 24 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत, सेशन कोर्ट ने दिया अहम फैसला
राजस्थान के बाड़मेर जिले से जुड़े बहुचर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 24 पुलिसकर्मियों सहित आईपीएस अधिकारी आनंद शर्मा को राहत दी है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में लंबे समय से चला आ रहा कानूनी तनाव समाप्त हो गया है।
क्या था पूरा एनकाउंटर मामला
यह मामला 22 अप्रैल 2021 की उस रात से जुड़ा है, जब बाड़मेर सदर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम ने कमलेश प्रजापत के आवास पर दबिश दी थी। पुलिस का दावा था कि कमलेश अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था।
दबिश के दौरान कमलेश ने पुलिस टीम से बचने के लिए तेज रफ्तार में अपनी XUV गाड़ी से भागने की कोशिश की और गेट तोड़कर बाहर निकल गया। इस दौरान उसने पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे कई जवानों की जान खतरे में पड़ गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें कमलेश की मौत हो गई। बाद में मौके से अफीम, नकदी, हथियार और लग्जरी वाहन बरामद किए गए थे।
परिजनों के आरोप और राजनीतिक विवाद
घटना के बाद परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि राजनीतिक दबाव और व्यावसायिक रंजिश के चलते यह कार्रवाई की गई।
इस मामले में तत्कालीन मंत्री हरीश चौधरी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए।
CBI जांच और क्लोजर रिपोर्ट
मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसने लंबी जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि पुलिस कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और एनकाउंटर वास्तविक था।
निचली अदालत का आदेश और नया मोड़
अप्रैल 2025 में निचली अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही राजनीतिक स्तर पर भी इस केस ने नया विवाद खड़ा कर दिया था।
सेशन कोर्ट का बड़ा फैसला
जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह स्पष्ट है कि पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।
कोर्ट के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करता है, तो कानून के तहत पुलिस को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है।
पुलिसकर्मियों को मिली बड़ी राहत
इस फैसले के बाद आईपीएस अधिकारी आनंद शर्मा सहित 24 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से चल रहे केस और जांच प्रक्रिया के कारण जिन पर कानूनी दबाव था, अब उनके खिलाफ फर्जी एनकाउंटर का आरोप समाप्त हो गया है।
राजनीतिक बयान और आगे का असर
इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी रही थी। पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के खिलाफ लगे आरोपों पर भी अब कानूनी स्थिति स्पष्ट मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद मारवाड़ की राजनीति में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है और पुलिस विभाग की छवि को लेकर उठे सवालों पर भी विराम लगेगा।